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हिमाचल में लंपी स्किन डिजीज: ऊना में 50 से ज्यादा मामले, फिल्ड में उतरा विभाग

लंपी स्किन डिजीज से पीड़ित पशुओं का दूध इस्तेमाल करने में बरतें सावधानी

हिमाचल में लंपी स्किन डिजीज: ऊना में 50 से ज्यादा मामले, फिल्ड में उतरा विभाग

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ऊना। हिमाचल प्रदेश के शिमला जिला के बाद अब मैदानी इलाके ऊना (Una) में भी पशुओं में फैल रही लंपी स्किन डिजीज (Lumpy Skin Disease) नाम की बीमारी फैलना शुरू हो चुकी है। जिला ऊना में लंपी स्किन डिजीज के मामलों में बेतहाशा वृद्धि होने लगी है। जिला में अभी तक 50 से ज्यादा मामले इस बीमारी के रिपोर्ट किए जा चुके हैं जिनकी जांच के लिए सैंपल जुटाकर भोपाल भेजे जा चुके हैं। बता दें कि पंजाब और राजस्थान के बाद अब हिमाचल प्रदेश में भी सैकड़ों की संख्या में पशुओं में यह बीमारी सामने आने लगी है। जबकि रोग की रोकथाम के लिए पशुपालन विभाग (Animal Husbandry Department) के चिकित्सक फील्ड में उतर गए हैं।

यह भी पढ़ें:राजस्थान के बाद हिमाचल पहुंची पशुओं में फैल रही लंपी स्किन डिजीज की बीमारी

जिला भर के उन स्थानों पर इस रोग के ज्यादा फैलने का खतरा मंडरा रहा है जहां पर काफी संख्या में एक साथ पशुओं को रखा गया है। जिनमें पशुशालाएं इस वक्त इस बीमारी की हिट लिस्ट पर आ चुकी हैं। जिला मुख्यालय के नजदीक एक गौशाला में 25 गायों में यह बीमारी साफ तौर पर देखी जा सकती है। वहीं चिकित्सकों ने इस रोग की रोकथाम के लिए पशुपालकों से फौरन पशुपालन विभाग से संपर्क करने के लिए भी कहा है। इस बीमारी के रोगी पशुओं के दूध का प्रयोग करने के लिए भी जरूरी एहतियाती कदम उठाने के लिए हिदायत जारी की गई है।

जिला में कल से शुरू होगा वैक्सीनेशन अभियान

राहत भरी खबर यह है कि अभी तक इस बीमारी के चलते जिला में किसी भी मवेशी की मौत नहीं हुई है। पशुपालन विभाग की तरफ से इस बीमारी से निपटने के लिए गठित की गई टीम के नोडल अधिकारी डॉ राकेश भट्टी का कहना है कि जिला में अभी तक 50 के करीब मामले दर्ज किए जा चुके हैं।  सोमवार को इस बीमारी की रोकथाम के लिए वैक्सीनेशन अभियान (Vaccination Campaign) भी शुरू किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि फिलहाल यह बीमारी केवल मात्र गायों में ही देखी जा रही है। उन्होंने बताया कि इस बीमारी से केवल मात्र 20 फीसदी पशु ही संक्रमित होंगे। जबकि इससे केवल मात्र 1 से 5: तक मवेशियों की अधिकतम मौत हो सकती है।

लंपी स्किन डिजीज से पीड़ित पशुओं के दूध का कैसे करें इस्तेमाल

वहीं दूसरी तरफ डॉ. अमित सामा का कहना है कि इस बीमारी से पीड़ित पशु का दूध (Milk) जरूरी एहतियात के साथ इस्तेमाल किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि संक्रमित गायों के दूध को गर्म किये बिना इस्तेमाल न करें।

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