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धर्मशाला को मिली नई लीडरशिप: शमशेर नेहरिया बने धर्मशाला के मेयर, प्रेरणा गुलेरिया डिप्टी मेयर
Dharmshala MC: नगर निगम धर्मशाला में पिछले काफी समय से चल रही मेयर और डिप्टी मेयर पद की सियासी खींचतान और सस्पेंस आखिरकार खत्म हो गया है। इस चुनावी रण में धर्मशाला के विधायक सुधीर शर्मा का दबदबा साफ देखने को मिला है। उनकी कुशल रणनीति के चलते धर्मशाला नगर निगम की कमान अब नए चेहरों के साथ पूरी तरह से बीजेपी के हाथों में आ गई है। नगर निगम के इस अहम चुनाव में बीजेपी ने नई लीडरशिप पर भरोसा जताया है। वार्ड नंबर 2 से बीजेपी पार्षद शमशेर नेहरिया को धर्मशाला का नया मेयर चुना गया है।महिला शक्ति का दम दिखाते हुए, वार्ड नंबर 8 की पार्षद प्रेरणा गुलेरिया ने डिप्टी मेयर के पद पर कब्जा जमाया है।
17 वार्डों का गणित और दिलचस्प सियासी समीकरण
धर्मशाला नगर निगम के कुल 17 वार्डों में हुए चुनाव में बीजेपी ने स्पष्ट बहुमत हासिल किया है। आंकड़ों पर नजर डालें तो भाजपा ने 11, कांग्रेस ने 5 और निर्दलीय ने 1 सीट पर जीत दर्ज की है। इस चुनाव प्रक्रिया के दौरान स्थानीय राजनीति के समीकरण बेहद दिलचस्प रहे। जीत के इस गणित में बीजेपी ने अपना पूरा संख्याबल दिखाया। मिनी सचिवालय में चुनाव प्रक्रिया के दौरान बीजेपी के 11 पार्षद एकजुट नजर आए। इसके अलावा निर्दलीय पार्षद नरेश की मौजूदगी ने भी अहम भूमिका निभाई, जिससे बीजेपी का पलड़ा पूरी तरह से भारी रहा और जीत बिना किसी बाधा के सुनिश्चित हो गई।
अतिक्रमण का विवाद और सियासी आरोप-प्रत्यारोप
बहुमत होने के बावजूद इस चुनाव में अतिक्रमण का मुद्दा काफी गरमाया रहा। शुरुआत में बीजेपी के तीन पार्षदों पर अतिक्रमण की शिकायत के बाद कार्रवाई का खतरा मंडरा रहा था, जिसकी जांच रिपोर्ट डीसी कांगड़ा ने सरकार को भेज दी है। हालांकि, इस बीच भाजपा ने आक्रामक रुख अपनाते हुए कांग्रेस पर बड़ा पलटवार किया है। बीजेपी ने बीजेपी के तीन नवनिर्वाचित पार्षदों और एक पूर्व प्रत्याशी पर सरकारी भूमि पर अतिक्रमण के गंभीर आरोप लगाए हैं। बीजेपी ने डीसी कांगड़ा को बाकायदा शिकायत पत्र सौंपकर मामले की निष्पक्ष जांच कराने और दोषी पाए जाने पर कानूनी कार्रवाई की मांग उठाई है।इस पूरे घटनाक्रम के बाद जहां एक ओर धर्मशाला नगर निगम में सत्ता परिवर्तन हो गया है, वहीं अतिक्रमण के आरोपों ने आने वाले दिनों में नई सियासी जंग के बीज बो दिए हैं। प्रशासन की जांच रिपोर्ट के बाद ही इस मामले में आगे की स्थिति साफ हो पाएगी।
रविंद्र चौधरी

