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ये है दुनिया का वो गांव जहां इंसान ही नहीं पशु-पक्षी भी हैं अंधे

पत्थरों पर सोते हैं, मक्का-मिर्च खाकर गुजारा करते हैं

ये है दुनिया का वो गांव जहां इंसान ही नहीं पशु-पक्षी भी हैं अंधे

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चलो आज फिर आपको एक नए किस्से के साथ रूबरू करवाएं, इससे पहले भी कई रहस्य दुनिया के हम आपको अपनी वीडियो स्टोरी में बताते रहते हैं। आज जो किस्सा आपको बताने जा रहे हैं वो एक ऐसे गांव का है,यहां इंसान (Humans)ही नहीं बल्कि पशु-पक्षी भी अंधे हैं। यहां तक की इस गांव के पक्षी उड़ नहीं पाते वो पेड़ से टकरा कर गिर जाते हैं। गांव का नाम है टिल्टेपक। गांव में जोपोटेक जाति (Jopotek Caste)के 300 रेउ इंडियन लोग रहते हैं। कहते हैं कि ये जन्म से अंधे (Blind) नहीं है,बल्कि जन्म के कुछ समय बाद अंधे हो जाते हैं।

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बताते हैं कि यहां लोग पत्थरों पर सोते हैं और मक्का, मिर्च खाकर गुजारा करते हैं। आज भी इन लोगों के पास लकड़ी के बने हुए औजार हैं। टिल्टेपक गांव (Tiltepak village) के ये लोग सड़क किनारे बनी झोपडियों में पत्थरों पर सोते हैं। इन्हें रोशनी की समझ ही नहीं है,इसलिए ये दिन की शुरुआत पशु-पक्षियों की आवाज से करते हैं। रात को यह लोग इकट्ठे होकर शराब पीते और नाचते नाचते गाते हैं बाद में भोजन करते है। बताते हैं कि यहां पर एक लावजुएजा नाम का पेड़ है जिसे देखकर यह लोग अंधे हो जाते है। लेकिन इसका दूसरा पहलू ये भी है कि यहां आने वाले पर्यटक इस पेड़ को देखकर अंधे नहीं होते।


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कुछ समय पहले वैज्ञानिकों (Scientists)ने इसका कारण ढूंढा है और उनका कहना है ऐसा एक कीटाणु के कारण होता है। काली मक्खी (Blackfly) के काटने पर यह कीटाणु शरीर में फैल जाता है जिसके कारण आंखों की नसें काम करना बंद कर देती है और किसी को भी दिखना बंद हो जाता है।

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