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जंतर-मंतर हिंसा: हमें भी न्याय का हक, संसद में उठे हमारी आवाज; घायल पुलिसकर्मियों के परिजनों का छलका दर्द
Jantar Mantar Violence: दिल्ली के जंतर-मंतर पर सीजेपी (CJP) के प्रदर्शन के दौरान हुई हिंसा में घायल हुए पुलिसकर्मियों और सुरक्षा बलों के परिजनों ने मीडिया से सामने अपना दर्द बयां करते हुए कहा कि 20 जुलाई की घटना के बाद से सिर्फ एकतरफा नैरेटिव चलाया जा रहा है। उन्होंने मांग की है कि एक नागरिक होने के नाते उन्हें भी न्याय मिलना चाहिए और उनकी आवाज को भी संसद में उठाया जाना चाहिए।
क्या बोले- घायल जवानों के परिवारवाले
घायल जवानों के परिवार वालों ने भावुक होकर उस खौफनाक दिन की आपबीती सुनाई। घायल ASI की पत्नी सीमा ने कहा-मेरे पति 33 साल से दिल्ली पुलिस में हैं। 20 जुलाई को ड्यूटी पर थे। शाम 7 बजे पता चला कि वे अस्पताल में भर्ती हैं। उन्होंने बताया कि भीड़ में असामाजिक तत्व शामिल हो गए थे और उन्होंने बैरिकेड्स तोड़कर पुलिस पर पत्थरों से हमला कर दिया। हेलमेट की वजह से उनकी जान बच पाई। 20 जुलाई के बाद से सिर्फ पुलिस को निशाना बनाया जा रहा है, जबकि असलियत कुछ और ही है। घायल पुलिसकर्मी की बेटी कुंजन के अनुसार उनके पिता पुलिस में आने से पहले नेवी में थे। 20 जुलाई की रात 10 बजे उनके साथी उन्हें घर लेकर आए। उनकी हालत देखकर मैं सहम गई थी। हम न्याय के लिए सुप्रीम कोर्ट भी गए हैं और वकीलों के माध्यम से अपनी बात रखी है। घायल ACP के बेटे लक्ष्य सिंह बिष्ट ने कहा मेरे पिता दिल्ली पुलिस में ACP हैं। प्रदर्शनकारियों ने उन पर पत्थरों से हमला किया, जिससे उनके सिर में गंभीर चोट आई.। जो जवान ड्यूटी पर चोट खा रहे हैं, उन्हें ही क्रिमिनल बताने की कोशिश की जा रही है। संसद में हमारे पक्ष पर कोई बात नहीं हो रही, इसलिए हमने कोर्ट का रुख किया है।
प्रदर्शनकारियों का निकला आपराधिक इतिहास
मामले की जांच कर रही दिल्ली पुलिस ने भी उपद्रवियों पर बड़ा खुलासा किया है। CCTV फुटेज के आधार पर पहचाने गए 2,873 प्रदर्शनकारियों में से 989 का पुराना आपराधिक इतिहास पाया गया है। इनमें से कई लोगों पर हत्या, डकैती, लूट, यौन उत्पीड़न और अपहरण जैसे संगीन मामले दर्ज हैं। पुलिस फिलहाल उन चेहरों की तलाश कर रही है जो घटना के वक्त अपना मुंह ढककर हिंसा और तोड़फोड़ में शामिल हुए थे।
पंकज शर्मा

