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लापरवाही पड़ ना जाए भारी, धर्मशाला Hospital में डिब्बों में बंद 11 वेंटिलेटर

लापरवाही पड़ ना जाए भारी, धर्मशाला Hospital में डिब्बों में बंद 11 वेंटिलेटर

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धर्मशाला। जिला कांगड़ा में कोरोना (Corona) मरीजों की संख्या 329 पहुंच चुकी है। चार महीने से हम इस महामारी का सामना कर रहे हैं, लेकिन इसके इलाज पर सिस्टम की लापरवाही इतनी भारी पड़ रही है कि जिला मुख्यालय के जोनल हॉस्पिटल धर्मशाला के कोविड केयर सेंटर (Covid Care Center) के लिए प्राइम मिनिस्टर सिटीजन असिस्टेंस एंड रिलीफ इन इमरजेंसी सिचुएशन फंड (प्राइम मिनिस्टर केयर्स फंड) के तहत 11 नए वेंटिलेटर (Ventilator) भेजे। तीन सप्ताह पहले धर्मशाला हॉस्पिटल में पहुंचे यह वेंटिलेटर अभी भी डिब्बों में पैक कोविड वार्ड के सिस्टर ड्यूटी रूम में बंद पड़े हैं। जोनल हॉस्पिटल प्रशासन ने हॉस्पिटल के सभी 300 बेड को ऑक्सीजन पाइप की सुविधा के साथ जोड़ने का प्रोजेक्ट शुरू किया है, जिसका जिम्मा एमपीएस प्रोजेक्ट्स को सौंपा गया है। जिन्हें इसे पूरा करने में ही अभी एक माह से अधिक का समय लगेगा। कोविड सेंटर (Covid Center) के लिए जरूरी उपकरण तो खरीद लिए, लेकिन वे डिब्बों में ही बंद है। इसका कारण है कि जोनल हॉस्पिटल में जहां एमडी मेडिसिन के डॉक्टर का पद पिछले कई माह से रिक्त हैं।

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पालमपुर सिविल हॉस्पिटल में तैनात एमडी मेडिसिन के डॉक्टर का तबादला आदेश सेक्रटरी हेल्थ ने धर्मशाला के लिए किए थे, लेकिन उन्होंने ज्वाइन ही नहीं किया। वहीँ एनेस्थीसिया का भी केवल एक ही डॉक्टर उपलब्ध है। ऐसे में इन 11 नए वेंटिलेटर स्थापित भी हो जाते हैं तो इनका इस्तेमाल कैसे होगा, जिसके चलते फिलवक्त हॉस्पिटल में उपस्थित डॉक्टर्स व पैरामेडिकल स्टाफ के चार-चार स्टाफ को सात-सात दिन की ट्रेनिंग दी जा रही है। तीन सप्ताह पहले धर्मशाला हॉस्पिटल में पहुंचे यह 11 वेंटिलेटर अभी भी डिब्बों में कोविड वार्ड के सिस्टर ड्यूटी रूम में बंद पड़े हैं। वर्तमान में इमरजेंसी वार्ड में दो वेंटिलेटर पहले से ही स्थापित हैं, जिन्हें सीधे ऑक्सीजन सिलेंडर से जोड़ा गया है।

कैसे काम करता है वेंटिलेटर

वेंटिलेटर एक ऐसी मशीन है जो किसी मरीज़ की सांस लेने में मदद करती है। ये फेफड़ों में ऑक्सीजन डालती है और कार्बन डाईऑक्साइड निकालती है। वेंटिलेटर को लाइफ सेविंग मशीन भी कहा जाता है क्योंकि ये उस समय इस्तेमाल की जाती है जब मरीज़ के फेफड़े काम करना बहुत कम कर देते हैं। वेंटिलेटर मशीन में एक ट्यूब जुड़ी होती है, जिसे मरीज़ के मुंह, नाक या गले में छोटे से कट के ज़रिए शरीर में डाला जाता है। कोविड-19 के इलाज में तकरीबन 5 फ़ीसदी मरीज़ों को ही क्रिटिकल केयर की ज़रूरत पड़ती है। ऐसे लोगों को उपचार के लिए आईसीयू में भर्ती किया जाता है।

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एमएस जोनल हॉस्पिटल धर्मशाला (Zonal Hospital Dharamshala) डॉ. दिनेश महाजन का कहना है कि प्राइम मिनिस्टर केयर्स फंड से मिले 11 वेटिलेंटर की स्थापना का कार्य प्रगति पर है। शीघ्र ही यह सुविधा हॉस्पिटल शुरू ही इसके लिए चार-चार डॉक्टर्स को एक सप्ताह की ट्रेनिंग दी जा रही है। अभी तक दो बैच ट्रेनिंग कर चुके हैं। हॉस्पिटल के 154 बेड को आक्सीजन पाइप लाइन जोड़ने का कार्य भी अंतिम चरण में है। एमडी मेडिसिन का पद रिक्त है। जिस डॉक्टर के आदेश हुए थे उन्होंने ज्वाइन नहीं किया है।

 

विधायक धर्मशाला विशाल नैहरिया का कहना है कि जोनल हॉस्पिटल धर्मशाला में 300 बेड के लिए ऑक्सीजन पाइप लाइन जोड़ने व पहले चरण में 154 पर कार्य करने, कोरोना सहित अन्य बिमारियों से निपटने के लिए 11 वेटिलेंटर उपलब्ध करवाए गए हैं। इससे पहले हॉस्पिटल स्टाफ व तामीरदारों को भी कई बार ऑक्सीजन सिलेंडर उठाकर इधर-उधर भागना पड़ता था। हॉस्पिटल में रिक्त पदों को लेकर सीएम के समक्ष मामला उठाकर रिक्त पदों पर भी डॉक्टरों की नियुक्ति की जाएगी, जिससे क्षेत्र के लोगों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं स्मार्ट सिटी के हॉस्पिटल में ही मिल पाएं।

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