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फुस्स निकला चाइनीज टीका: मलेशिया में मरने वाले 73% को लगी थी चाइनीज वैक्सीन

भारत में बनी एस्ट्राजेनेका की पूरी डोज लगने के बाद मौत का आंकड़ा 1.7 फीसदी

फुस्स निकला चाइनीज टीका: मलेशिया में मरने वाले 73% को लगी थी चाइनीज वैक्सीन

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नई दिल्ली। चाइनीज सामान की तरह ही चाइनीज वैक्सीन (Chinese Vaccine) भी फुस्स निकली। इसकी रपट मलेशिया से सामने आई है। साढ़े तीन करोड़ आबादी वाले द्वीपीय देश में 1 सितंबर से 30 अक्टूबर तक 7636 लोगों की मौतें हो चुकी हैं। इनमें से 2159 लोग ऐसे थे, जिन्हें कोरोना वैक्सीन की दोनों डोज लगाए करीब एक हफ्ते से अधिक समय बीत चुका था। चौंकाने वाली बात चाइनीज वैक्सीन को लेकर सामने आई है।

2159 में से 1573 लोगों को चाइनीज वैक्सीन सिनोवैक लगाई गई थी। जबकि फाइजर की दोनों डोज लगने के बाद कोरोना से कुल मौत का आंकड़ा 550 था। वहीं, एस्ट्राजेनेका लगने के बाद कोरोना से करीब 36 लोगों की मौत हुई थी।

मालूम हो कि भारत में एस्ट्राजेनेका के फॉमूले पर बनी कोविशील्ड लग रही है। मलेशिया में जान गंवाने वाले 7636 मरीजों में से 4076 ने वैक्सीन नहीं लगवाई थी। 1401 को दूसरी डोज लगनी बाकी थी। दोनों डोज के बाद मरने वालों में 75% लोगों की उम्र 60 से ऊपर थी। 94% ऐसे थे, जिन्हें एक से ज्यादा बीमारियां थीं। मलेशिया के स्वास्थ्य मंत्रालय ने खुद इन आंकड़ों की पुष्टि की है। बता दें कि चीन चारों रीजन (एशिया पैसेफिक, यूरोप, लैटिक अमेरिका, अफ्रीका) के 113 देशों को कोरोना टीका दे चुका है।

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वहीं, आईसीएमआर (ICMR) की रिसर्च के मुताबिक टीका लगवाने के बाद कोरोना से संक्रमित होने वालों में सिर्फ 0.4% लोगों की मौत हुई है। 677 कोविड मरीजों की जीनोम सीक्वेंसिंग करके यह निष्कर्ष निकाला गया। वैक्सीन लगवाने के बाद महज 10 फीसदी लोगों को अस्पताल में भर्ती करने की नौबत आई। इनमें से 86 प्रतिशत मरीजों में डेल्टा वैरिएंट पाया गया।

दुनिया के लिए खतरे की घंटी बनकर मलेशिया से यह रिपोर्ट सामने आई है। सिनोवैक की 76 करोड़ डोज दुनिया के अलग अलग हिस्सों में दी जा चुकी है। सिनोवैक ने सबसे अधिक 39.45 करोड़ डोज एिशया पैसिफिक रीजन में बेची है। चीन से टीका लेने में लैटिन अमेरिका (23.01 करोड़) दूसरे, यूरोप (10.72 करोड़) तीसरे और अफ्रीका (2.87 करोड़) चौथे नंबर पर है। हैरानी की बात यह है कि डब्लूएचओ ने सिनोवैक को जून महीने में मंजूरी दी थी।

वहीं, मलेशिया में दोनों डोज लगवाने के बाद भी संक्रमित होने वाले प्रति एक लाख लोगों में 10.11 को सिनोवैक वैक्सीन लगी थी। फाइजर के मामले में यह अनुपात 3.47 ही रहा है। एक्सपर्ट्स के मुताबिक, इसके पीछे कोई ठोस कारण सामने नहीं आया है। कहा जा रहा है कि सिनोवैक ज्यादा आबादी को लगाई गई और शुरू में ही इसका इस्तेमाल किया गया था, इसलिए इसके केस ज्यादा हैं।

बता दें कि मलेशिया में 24 फरवरी 2021 से वैक्सीनेशन शुरू हुआ और 17 सितंबर 2021 तक के आंकड़ों के मुताबिक 55.5% आबादी को दोनों डोज और 66.6% आबादी को सिंगल डोज लगाई जा चुकी है। यहां फाइजर, एस्ट्राजेनेका और सिनोवैक के टीके लगाए गए। इनमें से सबसे शुरुआती दौर में सिनोवैक लगाई गई। सर्वाधिक डोज भी इसी की लगीं। वहीं, भारत में 110 करोड़ से भी ज्यादा डोज लगाई जा चुकी हैं। इनमें 74.81 करोड़ सिंगल व 35.96 करोड़ डबल डोज शामिल हैं। टीका लगवाने वालों में 49.41 करोड़ लोग 18-44 साल के और 31.60 करोड़ लोग 45 साल से ऊपर के हैं। गुरुवार को देश में 38 लाख से ज्यादा डोज लगाई गईं।

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