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हिमाचल में ईद उल अजहा: अल्लाह के बारगाह में झुके सिर,मांगी अमन-चैन की दुआ
Eid al-Adha in Himachal: हिमाचल प्रदेश में ईद उल अजहा (बकरीद) का त्योहार मनाया गया। प्रदेश भर में मुस्लिम समुदाय ने ईद की नमाज अदा की और देश और प्रदेश के अमन शांति की दुआए मांगी गई। शिमला के रुलदूभठ्ठा स्थित ईदगाह मैदान में भी मुस्लिम समुदाय के लोगों ने नमाज अदा की और एक दूसरे के गले मिलकर ईद की बधाई दी।
ईदगाह, जामा मस्जिद में नमाज अदा की गई
शिमला शहर में ईदगाह, जामा मस्जिद सहित छोटा शिमला, कुतुब मस्जिद संजौली में मुस्लिम समुदाय के लोगों ने ईद की नमाज अदा की।कुर्बानी के जज्बे के साथ शिमला में गुरुवार को ईद-उल-अजहा के मौके पर अल्लाह की बारगाह में सिर सजदे में झुके। इसके साथ ही उस अजीम कुर्बानी को याद किया गया जो हजरत इब्राहिम ने अपने रब के हुक्म से पेश की थी। राजधानी के ईदगाह मैदान व जामा मस्जिद सहित शहर की अन्य मस्जिदों में नमाज अदा की गई। नमाज के बाद लोगों ने एक दूसरे से गले मिलकर ईद की बधाई दी।
ईद का दिन अल्लाह ने दिया है
मौलवी मुमताज अहमद कासमी ने कहा कि ईद का दिन अल्लाह ने दिया है। आज इस पाक दिवस पर नमाज अदा की गई। उन्होंने कहा कि आज की दिन दो चीज खास तौर पर बताई गई है । मजहब के एतबार से तोहिद जिसका अर्थ है अल्लाह और ईश्वर को एक मानो और खुद और अल्लाह एक ही है स्पार्क का सबसे बाद जो संदेश है कि हम एक अल्लाह और ईश्वर पर यकीन करें उसी की इबादत करें।
कुर्बानी या बलिदान का पैगाम
उन्होंने कहा आज के दिन का जो पैगाम है वह कुर्बानी या बलिदान है। एक तो जानवरों का बलिदान ,लेकिन असल बलिदान या कुर्बानी वह है जो इंसान के अंदर जज्बा पैदा करें कि वह देश और मुल्क के लिए कुर्बानी देने वाला बने। इंसानियत को बचाने के लिए कुर्बानी देने वाला बने और इसके साथ ही नफरतों को मिटाया जाए और आपसी प्रेम और भाईचारे से सभी त्यौहार मनाया जाए। यह इस पर्व का सबसे बड़ा संदेश है तोहिद और कुर्बानी।
संजू चौधरी

