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खतरे की आहट: काला हो रहा है समंदर का पानी, जलवायु परिवर्तन है कारण
वॉशिंगटन। आमतौर पर महासागरों का रंग हरा होता है, क्योंकि उसकी तलहटी में सभी तरह के सूक्ष्मजीवी (Microorganisms) प्रकाश को सोखते और परावर्तित करते हैं। लेकिन पिछले दो दशकों में पृथ्वी के महासागरों (Oceans of the Earth) का रंग काला हो रहा है। हाल के एक अध्ययन में पाया गया है कि इस बदलाव के पीछे का कारण जलवायु परिवर्तन है। वैज्ञानिकों ने चेतावनी दी है कि यह भविष्य के बड़े खतरे की आहट है।
लांसेट (Lancet) में प्रकाशित इस अध्ययन के मुताबिक, डेटा से यह साफ है कि समुद्री पारिस्थितिक तंत्र (Ecological System of the Oceans) में परिवर्तन हो रहा है। हालांकि, समुद्र के पारिस्थितिक तंत्र में क्या बदलाव हो रहे हैं, यह पूरी तरह से स्पष्ट नहीं हो पाया है। इसका पता लगाने वाली टीम का मानना है कि निश्चित रुप से इसके लिए मानव गतिविधि और जलवायु परिवर्तन (Climate Change) जिम्मेदार हैं। सेंटर फॉर ग्लोबल चेंज साइंस की सह-लेखक और वरिष्ठ शोध वैज्ञानिक स्टेफनी डट्किविक्ज ने एक बयान में कहा, ‘मैं वर्षों से सिमुलेशन चला रही हूं, जो मुझे बता रहे हैं कि समुद्र के रंग में बदलाव होने वाले हैं। वास्तव में ऐसा होते देखना हैरान करने वाला नहीं बल्कि भयावह है।’
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समुद्र को ऐसे मिलता है रंग
समुद्र के रंग का इस्तेमाल इसकी ऊपरी परतों में क्या है, इसका आकलन करने के लिए किया जा सकता है। उदाहरण के तौर पर गहरा नीला पानी जीवन के न होने का संकेत देता है। जबकि हरा पानी फाइटोप्लांकटन नामक पौधे जैसे रोगाणुओं के बारे में संकेत देता है। इसमें पत्तों को हरा रंग देने वाला क्लोरोफिल (Chlorophyll) होता है। फाइटोप्लांकटन सूर्य के प्रकाश के जरिए प्रकाश संश्लेषण करता है। ये पौधे छोटे मछलियों का भोजन बनते हैं और वे बड़ी मछलियों का पेट भरते हैं।
सैटेलाइट डेटा का हुआ इस्तेमाल
प्रकाश संश्लेषण में पौधे वायुमंडल से कार्बन डाइऑक्साइड को खींच सकते हैं। चूंकि यह एक प्रमुख ग्रीनहाउस गैस है, ऐसे में वैज्ञानिक जलवायु परिवर्तन के कारण इसकी प्रतिक्रिया की निगरानी करते हैं। शोध के प्रमुख लेखक और राष्ट्रीय समुद्र विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिक बी.बी. कैल ने कहा कि समुद्र के रंग में बदलाव इंसानों की ओर से पर्यावरण को पहुंचाए जा रहे नुकसान को दिखाते हैं। शोध के लिए वैज्ञानिकों ने एक्वा सैटेलाइट के 20 वर्ष के डेटा का इस्तेमाल किया है।
