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हिमाचल: क्लीनिक संचालक को 3 साल की सजा, दुष्कर्म मामले में 7 साल की कैद
धर्मशाला/नाहन। बिना लाइसेंस क्लीनिक चलाने वाले पपरोला जिला कांगड़ा के व्यक्ति के खिलाफ दोष सिद्ध होने पर न्यायालय ने दोषी को तीन साल का कारावास व एक लाख रुपये जुर्माना की सजा सुनाई है। न्यायालय (Court) में अभियोजन पक्ष की ओर से पेश किए गए 3 गवाहों व ड्रग इंस्पेक्टर आशीष रैणा (Drug Collector Ashish Raina) की रिपोर्ट के आधार पर सजा सुनाई। वहीं, सिरमौर के नाहन में अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश जसवंत सिंह की अदालत ने दुष्कर्म के दोषी को सात साल के कठोर कारावास व 22 हजार रुपये के जुर्माने की सजा सुनाई है। जुर्माना राशि की अदायगी ना करने की सूरत में दोषी को अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा।
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पहले मामले की जानकारी देते हुए कांगड़ा जिला न्यायवादी राजेश वर्मा ने बताया कि ड्रग इंस्पेक्टर को शिकायतें मिल रहीं थी कि बीड़ जिला कांगड़ा में बिना लाइसेंस (without license) एक व्यक्ति लोगों के स्वास्थ्य की जांच कर रहा है। शिकायत पर कार्रवाई करते हुए ड्रग इंस्पेक्टर आशीष रैणा ने 12 मार्च 2010 को तिब्बतियन कॉलोनी के पास मेसर सरस्वत क्लीनिक में दबिश दी। क्लीनिक में 11 प्रकार की एलोपैथी दवाइयां बरामद हुईं। यह दवाइयां अधिकतर सभी सामान्य बीमारियों के लिए थीं। इस दौरान क्लीनिक संचालक से क्लीनिक (Clinics) का लाइसेंस मांगा गया। संचालक बिहारी लाल निवासी पपरोला ने तर्क दिया कि उसके पास इंडियन बोर्ड ऑफ अल्टरनेटिव मेडिसन का सर्टिफिकेट है। इसी के आधार पर वह फैक्टरियों से दवाइयां मंगवाता है और यहां लोगों को बेचता है। इसके अलावा व्यक्ति किसी भी तरह का कोई सर्टिफिकेट नहीं दिखा सकता। बिना लाइसेंस व बिल के दवाइयां बेचने पर व्यक्ति के खिलाफ पुलिस थाना बैजनाथ में 18.सी ड्रग कॉस्मेटिक एक्ट 1940 के तहत केस दर्ज किया गया। ड्रग इंस्पेक्टर व पुलिस जांच के बाद केस विशेष जज एवं जिला सत्र न्यायधीश जेके शर्मा की अदालत में पहुंचा। न्यायालय में अभियोजन पक्ष की ओर से पेश किए गए 3 गवाहों व ड्रग इंस्पेक्टर आशीष रैणा की रिपोर्ट के आधार पर न्यायालय ने दोषी बिहारी लाल को तीन साल का कारावास व एक लाख रुपये जुर्माना की सजा सुनाई है।
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वहीं, सिरमौर के नाहन में अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश जसवंत सिंह की अदालत ने दुष्कर्म के दोषी को सात साल के कठोर कारावास व 22 हजार रुपये के जुर्माने की सजा सुनाई है। जुर्माना राशि की अदायगी न करने की सूरत में दोषी को अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा। शुक्रवार को अदालत ने दोषी जीत सिंह निवासी कुफर, डाकघर कांडो भटनोल, तहसील शिलाई को भादंसं की धारा 376 के तहत सात साल का कठोर कारावास व 20 हजार रुपये जुर्माना, धारा 506 में एक साल की कैद व एक हजार का जुर्माना और धारा 451 में भी एक साल की कैद व हजार रुपये के जुर्माने की सजा सुनाई।
अदालत में मामले की पैरवी उप जिला न्यायवादी एकलव्य ने की। उन्होंने बताया कि 2011 में दोषी ने अपने गांव की विवाहित महिला से जमटा के समीप जबदस्ती गाड़़ी से उतारकर वारदात को अंजाम दिया।
इसके बाद आरोपी ने सितंबर 2013 में भी महिला को डरा धमका कर घर में घुसकर दुष्कर्म किया। महिला ने जब अपनी सहेली को आपबीती सुनाई तो यह बात सामने आई कि आरोपी ने 2007 में उससे भी दुष्कर्म किया था। इसके बाद अगस्त 2013 में भी आरोपी ने उसे हवस का शिकार बनाया। सहेली पीड़िता को आरोपी ने कमरऊ सड़क पर रास्ते में सुनसान जगह ले जाकर दुष्कर्म किया था। लिहाजा, पहली पीड़िता ने अपने पति को यह बात बताई और पुलिस को शिकायत दी। साथ ही उसकी सहेली ने भी अदालत के समक्ष अपने बयान दर्ज कराए। पुलिस ने आरोपी के खिलाफ केस दर्ज कर मामले की गहनता से तफ्तीश पूरी करने के बाद अदालत में चालान पेश किया। शुक्रवार को अदालत ने तमाम दलीलों व साक्ष्यों के आधार पर आरोपी जीत सिंह को दोषी करार देते हुए यह सजा सुनाई। उप जिला न्यायवादी एकलव्य ने बताया कि सभी सजाएं एक साथ चलेंगी। जुर्माना अदा ना करने की सूरत में दोषी को अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा।
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