-
Advertisement
₹1500 पेंशन के लिए बहू 90 साल की सास को पीठ पर उठा 9 KM पैदल चलकर पहुंची बैंक
Viral News: छत्तीसगढ़ के मैनपाट क्षेत्र से सरकारी दावों और बैंकिंग सिस्टम की पोल खोलने वाली एक बेहद दर्दनाक और भावुक करने वाली तस्वीर सामने आई है। यहां एक मजबूर बहू को अपनी 90 वर्षीय बुजुर्ग सास की रुकी हुई पेंशन के 1500 रुपए निकालने के लिए उन्हें पीठ पर उठाकर करीब 9 किलोमीटर दूर बैंक ले जाना पड़ा। इस संघर्ष का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद अब प्रशासनिक अमले और बैंकिंग व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।
यह महिला कंधे पर अपनी सास को नहीं बल्कि हमारे देश के सिस्टम का भार उठा कर चल रही है।
वीडियो सरगुजा जिले का मैनपाट का है। https://t.co/3HVqd5Zjh0 pic.twitter.com/VOlbrkRjRF
— Voice of Chhattisgarh (@CGVOICE00777) May 23, 2026
पथरीला रास्ता, भीषण गर्मी और मजबूरी का सफर
यह पूरा मामला मैनपाट विकासखंड की कुनिया ग्राम पंचायत का है। यहां रहने वाली सुखमुनिया बाई की बुजुर्ग सास चलने-फिरने में पूरी तरह असमर्थ हैं। गांव से बैंक तक पहुंचने का रास्ता बेहद पथरीला, जंगलों से घिरा और पहाड़ों व नालों से भरा है। इस दुर्गम रास्ते पर किसी गाड़ी या परिवहन की कोई सुविधा नहीं है। इस भीषण गर्मी के बीच, सुखमुनिया अपनी बुजुर्ग सास को पीठ पर लादकर इन्हीं कच्चे और पथरीले रास्तों से होते हुए नर्मदापुर स्थित सेंट्रल बैंक पहुंचीं।
3 महीने बाद मिले महज 1500 रुपये, ग्रामीणों में आक्रोश
परिजनों का कहना है कि पहले गांव में ही ‘बैंक मित्र’ के माध्यम से बुजुर्गों को पेंशन की राशि मिल जाया करती थी, लेकिन पिछले कुछ समय से बैंक आना अनिवार्य कर दिया गया है। 9 किलोमीटर की कठिन परीक्षा पार कर जब यह परिवार बैंक पहुंचा, तो व्यवस्था का एक और अमानवीय चेहरा सामने आया। बुजुर्ग महिला के खाते में कुल 4 महीने के 2000 रुपये जमा थे, लेकिन उन्हें 3 महीने की रुकी हुई पेंशन के रूप में महज 1500 रुपये ही दिए गए। डिजिटल इंडिया के इस दौर में एक बुजुर्ग महिला को अपनी मूलभूत सुविधा के लिए इस तरह तड़पना पड़ा, जिससे स्थानीय ग्रामीणों में भारी आक्रोश है। ग्रामीणों ने मांग की है कि बुजुर्गों और दिव्यांगों के लिए गांव स्तर पर ही भुगतान की पुख्ता व्यवस्था की जाए।
बैंक प्रबंधन का दावा: ‘पहले बताते तो घर पर मिल जाती सुविधा
मामला तूल पकड़ने के बाद नर्मदापुर सेंट्रल बैंक के प्रबंधक मिर्जा अल्ताफ बेग ने अपनी सफाई दी है। उनका दावा है कि मैनपाट क्षेत्र में घर-घर जाकर पेंशन देने के लिए 8 बैंक मित्र काम कर रहे हैं। प्रबंधक ने कहा कि अगर परिजनों ने इस संबंध में बैंक को पहले सूचना दी होती, तो बैंक मित्र को सीधे हितग्राही के घर भेजकर पैसे का भुगतान करवा दिया जाता। स्थानीय लोगों का कहना है कि कागजी दावों और जमीनी हकीकत में जमीन-आसमान का अंतर है, और इस घटना ने व्यवस्था के संवेदनहीन चेहरे को एक बार फिर बेनकाब कर दिया है।
पंकज शर्मा

