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एक बार तो हिटलर भी डरा था, दूसरे विश्व युद्ध के दौरान, वजह कर देगी हैरान

गलती से बन गई थी इतनी जहरीली गैस कि उसे युद्ध में इस्तेमाल करने से डरा

एक बार तो हिटलर भी डरा था, दूसरे विश्व युद्ध के दौरान, वजह कर देगी हैरान

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रूस-यूक्रेन युद्ध के बीच हिटलर का नाम सामने आने लगा है। हिटलर (Hitler) कहते हैं कि कभी डरा नहीं था,लेकिन युद्ध के मैदान में वो भी एक बार तो डर गया था। दूसरे विश्व युद्ध के दौरान हिटलर के पास मौका था कि वो सेरिन गैस का इस्मेताल करें लेकिन उसने ऐसा नहीं किया। वास्तव में खतरनाक सेरिन गैस की खोज नाजियों (Nazis) ने ही की थी वो भी गलती से। वर्ष 1938 में जर्मन वैज्ञानिक गेरहार्ड स्क्रेडर (German scientist Gerhard Schrader) को जर्मन खेतों और बागों को नुकसान पहुंचाने वाले कीटों को मारने के लिए एक सस्ता कीटनाशक बनाने का काम काम सौंपा गया था।

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गेरहार्ड ने फास्फोरस को साइनाइड को एक साथ मिलाकर कुछ ऐसा बनाया जो कृषि प्रयोजनों के लिए उपयोग करने के लिए बहुत जहरीला था। इस गैस का इस्तेमाल करने वाले इंसानों की जान जाने लगी और फसल भी मरने लगी। इस वैज्ञानिक की खोज से जर्मन सैनिकों में खुशी की लहर दौड़ गई लेकिन दूसरी तरफ गेरहार्ड ने अपनी खोज जारी रखी और और एक ऐसी गैस का खोज किया जिसे सेरिन (Serine Gas) कहा गया। युद्ध के दौरान ऐसा नहीं था कि हिटलर ने किसी केमिकल गैस का इस्तेमाल करने पर रोक लगाई थी। नाजी कैंपों में लाखों यहूदियों को जहरीली गैस (Inhaling poison gas) देकर ही मारा गया था। इतना ही नहीं प्रथम विश्व युद्ध में भी जहरीली गैस का इस्तेमाल हो चुका था। लेकिन फिर ऐसा क्या हुआ कि जर्मन सैनिकों के बहुत जोर देने के बाद भी हिटलर ने इस गैस का इस्तेमाल की मंजूरी नहीं दी।

हिटलर के जीवन पर लिखी किताब में इतिहासकार इयान केरशॉ ने लिखा है कि 1918 में 13.14 अक्टूबर रात को हिटलर जो उस दौरान सैनिक था वो मस्टर्ड गैस से हुए हमले का शिकार हुआ था। इस दौरान वो आंशिक रूप से अंधा हो गया था और वो मुश्किल से अपनी जान बचा पाया था। इस हमले के बाद हिटलर को फ्लैंडर्स से पोमेरेनिया (Pomerania) के एक सैन्य अस्पताल में ले जाया गया, जहां उसे प्रथम विश्व युद्ध में जर्मनी की हार का पता चला।

हालांकि, गैस के इस्तेमाल ना करने के पीछे एक और कहानी बताई जाती है। द्वितीय विश्व युद्ध (World War II) के दौरान, चर्चिल रासायनिक हथियारों का उपयोग करने के लिए तैयार थे, लेकिन केवल उस स्थिति में अगर दुश्मन ने पहले केमिकल से हमला किया। फरवरी 1943 में, जब लंदन को पता चला कि (Germans) जर्मन डोनेट बेसिन (Donat Basin) में रूसियों के खिलाफ गैस का इस्तेमाल कर सकते हैं, चर्चिल ने अपने चीफ ऑफ स्टाफ कमेटी को लिखा, अगर जर्मनी (Russians) रूसियों पर गैस का इस्तेमाल करता है तो ऐसी स्थिति में.. हम जर्मन शहरों पर जितनी हो सके उतनी अधिक मात्रा में गैस का इस्तेमाल करेंगे। भले ही कोई भी कारण रहा हो लेकिन हिटलर ने दूसरे विश्व युद्ध के दौरान इस गैस के इस्तेमाल पर रोक लगा रखी थी।

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