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इस सिलेंडर से रसोई में खाना बनाना होगा सस्ता, इस्तेमाल के हिसाब से आएगा बिल

एलपीजी के मुकाबले सस्ती है पीएनजी

इस सिलेंडर से रसोई में खाना बनाना होगा सस्ता, इस्तेमाल के हिसाब से आएगा बिल

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देश में रसोई गैस सिलेंडर के दाम लगातार बढ़ रहे हैं। सर्दियों के दिनों में एलपीजी सिलेंडरों में गैस नीचे जम जाती है, लेकिन पीएनजी में ऐसी कोई दिक्कत नहीं होती है। पीएनजी आपकी किचन में जगह भी नहीं घेरती है। ऐसे में पाइप्ड नेचुरल गैस (पीएनजी) (PNG) एक अच्छा ऑप्शन हैं। इसके अलावा पीएनजी एलपीजी के मुकाबले सस्ती भी पड़ती है।

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बता दें कि देश की राजधानी दिल्ली में अभी बिना सब्सिडी वाले 14.2 किलोग्राम घरेलू एलपीजी सिलेंडर का दाम 899.50 रुपए है। यानी एक किलोग्राम गैस का दाम 63.35 रुपए पड़ता है। वहीं, इंद्रप्रस्थ गैस लिमिटेड के पीएनजी का दाम मामूली बढ़ाने के बाद भी 35.61 रुपए प्रति स्टैंडर्ड क्यूबिक मीटर है। जबकि, 1 किलोग्राम एलपीजी 1.16 स्टैंडर्ड क्यूबिक मीटर के बराबर होती है। यानी 1 किलोग्राम एलपीजी गैस के बराबर पीएनजी की कीमत 41.30 रुपये होगी।

ये होती है पीएनजी

पीएनजी यानी पाइप्ड नेचुरल गैस। इस नेचुरल गैस को उद्योगों या घर तक पाइप के जरिये पहुंचाया जाता है। पीएनजी गैस घरेलू गैस (एलपीजी) की तुलना में 30 प्रतिशत सस्ती होती है। पीएनजी केवल 515 फीसदी तक हवा के साथ मिलने होने पर ही आग पकड़ती है, जबकि एलपीजी अगर 2 फीसदी या उससे अधिक हवा के साथ मिल हो जाए तो भी आग पकड़ लेती है।

पीएनजी है सस्ती

एक सिलेंडर के लिए अभी आप जहां 899.50 रुपए का भुगतान करते हैं, वहीं इतनी ही पीएनजी के लिए आपको केवल 586.46 रुपए देने होंगे। इस हिसाब से अगर आप हर महीने एक सिलेंडर इस्तेमाल करते हैं तो आपके 313.04 रुपये की बचत होगी।

ऐसे चुकाने होते हैं पैसे

बता दें कि पीएनजी के लिए आपको बिल का भुगतान इस्तेमाल के हिसाब से करना होता है। अगर आप इसका इस्तेमाल कम करते हैं, तो बिल कम आएगा।

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70 प्रतिशत आबादी तक पहुंचेगा पीएनजी

देश की सरकार ने देश की 70 प्रतिशत आबादी तक पीएनजी कनेक्शन पहुंचाने का प्लान बनाया है। देश के 27 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में कुल 228 एरिया के लिए सीएनजी और पीएनजी का लाइसेंस कंपनियों को दिया जाना है। देश के करीब 400 जिलों में लगभग 4 करोड़ पीएनजी कनेक्शन दिए जाने हैं। हाल ही में सरकार ने शहरी गैस वितरण के लिए कंपनियों को लाइसेंस देने की 11वें दौर की बोलियां का चक्र पूरा किया है।

 

 

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