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हिमाचल: हॉकी का नेशनल खिलाड़ी सुनील रेहड़ी पर बेच रहा फल और सब्जियां

हिमाचल: हॉकी का नेशनल खिलाड़ी सुनील रेहड़ी पर बेच रहा फल और सब्जियां

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हमीरपुर। हिमाचल के हमीरपुर बाजार में हॉकी का नेशनल खिलाड़ी (Hockey National Player) सुनील कुमार रेहड़ी पर फल और सब्जियां बेचने को मजबूर हैं। किसी वक्त हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय हॉकी टीम का कैप्टन रहा सुनील पारिवारिक मजबूरी के कारण अब हरा धनिया, आलू, प्याज और फल बेच कर परिवार को पाल रहा है। पिता वेद प्रकाश हाई शुगर के मरीज है और मां पुष्पा लिवर के रोग से ग्रसित हैं। 2 साल पहले ही सुनील का एक बाइक एक्सीडेंट (Bike Accident) हुआ जिसके बाद अब हॉकी की स्टिक भी हाथ से छूट गयी है और खेल से नाता भी। पिता बीमारी की वजह से रेहड़ी नहीं चला पा रहे हैं तो बेटे सुनील कुमार को अब माता और पिता के इलाज के लिए रेहड़ी पर फल और सब्जियां बेचनी पड़ रही हैं।

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बता दें कि बिलासपुर स्थित प्रदेश सरकार के स्टेट हॉस्टल में रहते हुए सुनील ने स्नातक की पढ़ाई राजकीय महाविद्यालय बिलासपुर से पूरी की और इस दौरान कई दफा उन्होंने प्रदेश का प्रतिनिधित्व राष्ट्रीय स्तर पर किया। वह हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय की हॉकी टीम के कैप्टन भी रहे। सुनील ने हॉकी में 8 नेशनल खेले हैं। स्कूल स्तर से लेकर कॉलेज तक 2017 तक उन्होंने देश के विभिन्न हिस्सों में नेशनल लेवल के टूर्नामेंट में हिस्सा लिया है। वहीं सुनील कुमार बीमार माता-पिता के लिए रेहड़ी पर फल और सब्जियां बेचने को मजबूर हैं। सुनील कुमार ने सरकारी नौकरी के लिए हर जगह कोशिश की। यहां तक कि फिशरीज विभाग और पुलिस की लिखित परीक्षा भी उतीर्ण की, लेकिन इंटरव्यू में उन्हें सफलता नहीं मिली। सुनील कुमार ने कहा कि उन्होंने अपनी तरफ से हर संभव प्रयास कियाए लेकिन इंटरव्यू में उन्हें सफलता नहीं मिली। अब इंटरव्यू में सफल ना होने की शिकायत किससे करें।

 

 

जूनियर वर्ग में नेशनल खिलाड़ियों को भी सरकारी नौकरी में मिले कोटा

जूनियर वर्ग में एक दो नहीं बल्कि 8 नेशनल खेल चुके खिलाड़ी सुनील कुमार को सरकारी नौकरी में भी इसका कोई लाभ नहीं मिला है। दरअसल जूनियर वर्ग के खिलाड़ियों के लिए सरकार की तरफ से सरकारी नौकरी के लिए कोटे का प्रावधान नहीं किया गया है। जिसका खामियाजा सुनील जैसे खिलाड़ियों को भुगतना पड़ता है। सुनील कुमार ने कहा कि यदि सरकार की तरफ से जूनियर वर्ग खिलाड़ियों को इसका लाभ दिया जाता तो उन्हें भी सरकारी नौकरी में मदद प्राप्त होगी। उनका कहना है कि जूनियर वर्ग में नेशनल खेलने वाले खिलाड़ियों के लिए भी सरकारी नौकरी में कोटा होना चाहिए।

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