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छात्रों की 10वीं की परीक्षा में फेल होने की टेंशन खत्म,HPBOSE ने पहली बार शुरू किया ड्यूल एग्जामिनेशन सिस्टम
HPBOSE: हिमाचल प्रदेश स्कूल शिक्षा बोर्ड के इतिहास में अब पहली बार बिना फेल होने की टेंशन के छात्र एग्जाम देंगे। राज्य स्कूल शिक्षा बोर्ड धर्मशाला ने इन परीक्षाओं से ही पहली बार डयूल एग्जामिनेशन सिस्टम लागू कर दिया है। जिसमें बोर्ड की मार्च-अप्रैल की फाईनल परीक्षाओं में पॉयलट प्रोजेक्ट के तहत दसवीं के छात्रों को सुविधा प्रदान की जा रही है। जिसमें दसवीं के छात्रों को मार्च के बाद जून-जुलाई में दो बार परीक्षाएं देकर पास होने का मौका प्रदान किया जाएगा। इसमें अहम ओर बड़ी बात यह है कि दसवीं के छात्रों को पांच अनिवार्य विषय में पास होना अनिवार्य होता है, जिसमें अब मात्र तीन विषयों में पास होने पर भी छात्र आगामी कक्षाओं में बैठ सकेंगे। जबकि दो विषयों को पास करने के लिए जून-जुलाई में मौका प्रदान किया जाएगा। इतना ही नहीं किसी छात्र को पास होने पर भी अपने अंक बढ़ाने के लिए दोबारा परीक्षा देने की जरूरत लगती है, तो इंप्रूवमेंट के तहत जून-जुलाई में अपने तीन विषयों की परीक्षा दे सकेंगे। इसके आधार पर ही छात्रों की दोनों परीक्षाओं का आंकलन करने के बाद ही फाईनल मार्कलिस्ट व मैरिट सूची बनाई जाएगी।
छात्रों पर अनावश्यक दबाव कम करना
हिमाचल प्रदेश स्कूल शिक्षा बोर्ड के सचिव डॉक्टर मेजर विशाल शर्मा ने बताया कि हिमाचल प्रदेश स्कूल शिक्षा बोर्ड धर्मशाला की ओर से नई शिक्षा नीति-2020 के अनुरूप राज्य में परीक्षा प्रणाली में बड़े बदलाव 2025-26 शैक्षणिक सत्र से ही लागू कर दिए हैं। इसमें विद्यार्थियों को अब एक ही सत्र में पास होने के लिए दो अवसर मिलेंगे। इनमें मुख्य परीक्षा फरवरी-मार्च और सुधार परीक्षा यानी इंप्रूवमेंट जोकि कंपार्टमेंट वाले छात्रों के लिए भी रहेगी उसे जून-जूलाई में करवाया जाएगा। इसका उद्देश्य छात्रों पर अनावश्यक दबाव कम करना और सीखने की प्रक्रिया को अधिक प्रभावी बनाना है।
फेल होने पर एक बार ही पास होने का मौका
बोर्ड के अनुसार मुख्य परीक्षा वर्ष में एक बार होगी, जबकि सुधार परीक्षा उसके बाद उन विद्यार्थियों के लिए होगी जो अपने अंकों में सुधार करना चाहते हैं या मुख्य परीक्षा में पांच में से तीन में पास व दो में फेल हुए हैं। अब तक मात्र एक विषय में फेल होने पर छात्रों को कंपार्टमेंट दी जाती थी, जबकि दो विषय में फेल होने पर उन्हें अपनी पूर्व कक्षा में ही बैठने के लिए मजबूर होना पड़ता था। जबकि अब छात्रों को अनिवार्य सुधार, ‘वैकल्पिक सुधार और ‘अनिवार्य पुनरावृत्ति जैसी नयी श्रेणियों में विभाजित किया गया है। इसमें किसी भी विद्यार्थी को दो विषय में फेल होने पर एक बार ही पास होने का मौका मिल पाएगा, हालांकि एक विषय में फेल होने पर कंपार्टमेंट श्रेणी में रखा जाएगा, जिसे वह दोबारा मार्च-अप्रैल की परीक्षा के दौरान पास कर पाएंगे। इसके अलावा पूरी तरह से सभी पांचों विषयों में पास होने वाले छात्रों को भी दोबार सुधार यानी एग्जाम किसी कारण ठीक न होने की स्थिति में अधिकतम तीन विषयों में इंप्रूवमेंट का मौका भी प्रदान किया जाएगा। इसके बाद दोनों ही परीक्षाओं के बेस्ट कंबीनेशन के तहत छात्रों को मार्कलिस्ट प्रदान की जाएगी।
मनोज ठाकुर
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