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कांगड़ा चाय का इतिहास ब्रिटिश काल से जुड़ा है। उस समय कांगड़ा चाय का निर्यात यूरोपीय बाजारों में किया जाता था। पूरे कांगड़ा जिले में करीब 2100 से 2200 हेक्टेयर क्षेत्र में चाय की खेती की जा रही है। जिले में सालाना लगभग 9 लाख किलोग्राम चाय का उत्पादन होता है। बारिश की कमी के कारण उत्पादन प्रभावित होने के साथ-साथ चाय बागानों में काम करने वाले मजदूरों की आय पर भी असर पड़ा है। धर्मशाला के तीनों गार्डन और फैक्ट्रियों में करीब 1000 मजदूर चाय पत्ती तोड़ने का काम करते हैं, लेकिन ड्राई स्पेल के चलते काम कम होने से उनकी आमदनी भी घट गई है। हाल ही में हुई बारिश से उम्मीद जताई जा रही है कि उत्पादन में आई कमी को कुछ हद तक पूरा किया जा सकेगा।
