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#Dalai_Lama को सुरक्षित निर्वासन में लाने वाले Personal Bodyguard अनेन दावा का निधन

83 वर्ष की आयु में अमेरिका के मिनेसोटा में ली अंतिम सांस

#Dalai_Lama को सुरक्षित निर्वासन में लाने वाले Personal Bodyguard अनेन दावा का निधन

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मैक्लोडगंज। तिब्बती धर्मगुरू दलाई लामा (The Dalai Lama) के अंतिम जीवित निजी अंगरक्षक (last Surviving Personal Bodyguard) अनेन दावा, का 83 वर्ष की आयु में निधन हो गया। अमेरिका के मिनेसोटा में उन्होंने अंतिम सांस ली। वर्ष 1939 में जन्मे, अनेन दावा (Anen Dawa)केवल 15 वर्ष के थे, जब वे तिब्बत के नोरबुलिंगका में दलाई लामा की व्यक्तिगत सेना में शामिल हुए। चार साल के बाद, उन्हें औपचारिक रूप से सेना में शामिल किया गया और अगले 4 वर्षों के लिए सेरा, ड्रेपंग और गादेन मठों में स्कूली शिक्षा के माध्यम से दलाई लामा की सेवा करने के लिए व्यक्तिगत गार्ड के रूप में काम करना जारी रखा।

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मार्च 1959 में घटनाओं के सबसे महत्वपूर्ण मोड़ में, जब तिब्बती विद्रोह को कुचल दिया गया था और चीनी सैन्य हमलों (Chinese Military Attacks) का खतरा बढ़ रहा था, उसी दौरान 17 मार्च 1959 की रात को, दलाई लामा हजारों तिब्बतियों के साथ निर्वासन (Tibetans fled into exile) में आने लगे तो अनेन दावा ने तिब्बती धार्मिक गुरू के निर्वासन के सुरक्षित मार्ग को सुनिश्चित करने के लिए अपने कर्तव्यों को पूरा किया। 31 मार्च को भारत में सुरक्षित रूप से पहुंचने पर, निजी अंगरक्षकों और स्वयंसेवकों के एक समूह ने तिब्बत लौटने का फैसला किया ताकि चीनी सेना के खिलाफ प्रतिरोध खड़ा किया जा सके। उस समय उनमें से सबसे छोटे अनेन दावा और एक अन्य अंगरक्षक को दलाई लामा ने मसूरी (Mussourie) साथ जाने के लिए कहा।

दलाई लामा के निर्देशों के अनुसार, वह पहले 50 छात्रों में से एक के रूप में मसूरी में स्थापित तिब्बती होम्स स्कूल (Tibetan Homes School in Mussourie) में शामिल हुए। स्कूली शिक्षा पूरी करने के बाद, नेपाल में आने वाले तिब्बती शरणार्थियों के लिए एक अनुवादक और सूत्रधार की क्षमता में समर्पित रूप से कार्य किया। इसके बाद उन्होंने कॉर्नेल विश्वविद्यालय में अमेरिका में अपनी आगे की पढ़ाई की और बाद में बोस्टन से उन्होंने स्नातक की उपाधि प्राप्त की।

वर्ष1972 में, वह केंद्रीय तिब्बती प्रशासन के कारखाने में एकाउंटेंट (CTA-Administrated Factory) के रूप में सेवा करने के लिए नेपाल (Nepal) में तैनात रहे। बाद में 1979 से कई वर्षों तक, उन्होंने मसूरी में तिब्बती होम्स स्कूल में बच्चों के स्वास्थ्य, तिब्बती संस्कृति और नैतिकता,आधारित शिक्षा के लिए अथक प्रयास किया। अंत में, 1996 में वह पुनर्वास नीति के माध्यम से सेवानिवृत्त होकर अमेरिका के मिनेसोटा (Minnesota in US) में रहने लगे। 26 दिसंबर तक अनेन दावा अपने परिवार के साथ थे, उसके अगले दिन 27 दिसंबर को उनका निधन हो गया। उनके परिवार में पत्नी खांडो डावा, तीन बच्चे त्सेयांग, चोएवांग और चोएफ़ेल के अलावा पोती ज़ेंडेन है।

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