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अजीबोगरीब परंपरा: यहां पुरुष साड़ी पहनकर करते हैं देवी की पूजा

यह परंपरा पिछले 229 साल से निभाई जा रही है

अजीबोगरीब परंपरा: यहां पुरुष साड़ी पहनकर करते हैं देवी की पूजा

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नई दिल्ली। हमारे देश में भगवान की पूजा को लेकर कई परंपराएं और विधि विधान हैं। जिन्हें लोग श्रद्धा भाव से निभाते हैं। कई परंपराएं तो बेहद अजीबोगरीब है। ऐसी ही एक परम्परा पश्चिम बंगाल के हुगली जिले के चंदननगर में निभाई जाती है। जिसे सुनकर आपका सिर चक्कर खा जएगा। इस परम्परा के दौरान पुरुष साड़ी पहनकर देवी मां की पूजा (Men Worship Goddess) करते हैं। यह परंपरा पिछले 229 साल से निभाई जा रही है।

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कहा जाता है कि बीते 229 साल से चंदन नगर (Chandan Nagar Tradition) में यह परम्परा निभाई जा रही है। इस परंपरा के दौरान मां जगधात्री की पूजा (Jagadhatri Puja) की जाती है। इस दौरान घर की महिलाएं नहीं, बल्कि पुरुष साड़ी पहनकर माता की पूजा करते हैं। इस बार भी चंदन नगर का नजारा काफी अद्भुत था। पुरुषों ने साड़ी पहनकर मां जगधात्री की सिंदूर और पान से पूजा-अर्चना की।

बता दें कि बंगाली कल्चर में सदियों से मां दूर्गा के विभिन्न रूपों की पूजाएं महिलाएं करती आ रही हैं, लेकिन मां जगधात्री की पूजा के दौरान अलग ही नजारा देखने को मिलता है। इस दौरान 13 पुरुषों ने एक साथ साड़ी पहनकर और सिर पर पल्लू डालकर मां जगधात्री का वरण किया। हर साल यह बहुत ही मोहक दृश्य होता है।

स्थानीय बताते हैं कि 229 साल पहले जब देश पर ब्रितानिया हुकूमत का शासन था, तब शाम ढलने के बाद अंग्रेजों के डर के मारे महिलाएं घरों से नहीं निकलती थीं। उस दौरान उनके पूर्वजों ने साड़ी पहनकर मां जगधात्री का वरण किया था। इसके बाद तो यह एक परंपरा अनवरत चल निकली। और पुरुष साड़ी पहन कर मां जगधात्री की पूजा अर्चना करने लगे।

वहीं, मामले को लेकर अधिक जानकारी देते हुए मंदिर के संरक्षक ने बताया कि 250 साल पहले बंगाल के राजा कृष्णचंद्र दीवान दाताराम सूर हुआ करते थे। उनकी बेटी का चंदननगर के गौरहाटी में घर था। वहीं पर जगधात्री मां की आराधना होती थी। हालांकि जब उनके घर में आर्थिक तंगी आई तो राजा की बेटी ने इस पूजा को इलाके के लोगों को हस्तांतरित कर दिया। उस दौर में महिलाओं के लिए पर्दा प्रथा का प्रचलन था। इसी कारण जगधात्री मां के विसर्जन के दिन पुरुष साड़ी पहनकर वरण की प्रक्रिया पूरा करते थे।

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