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ज्‍येष्‍ठ पूर्णिमा : आज है बेहद शुभ योग, भगवान विष्‍णु की पूजा से बरसेगी कृपा

इस दिन सावित्री के पति सत्‍यवान को मिला था जीवनदान

ज्‍येष्‍ठ पूर्णिमा : आज है बेहद शुभ योग, भगवान विष्‍णु की पूजा से बरसेगी कृपा

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हिंदू धर्म में पूर्णिमा का बड़ा महत्व है। शरद पूर्णिमा के बाद ज्‍येष्‍ठ पूर्णिमा को बेहद खास माना जाता है। इसको लेकर कई मान्‍यताएं भी हैं। इस बार यह पूर्णिमा 24 जून गुरुवार को है।  गुरुवार का दिन भगवान विष्णु को समर्पित है इसलिए ये पूर्णिमा (Jyeshtha Purnima) और भी शुभ होगी। इसके अलावा पूर्णिमा के दिन सूर्य और चंद्रमा, मिथुन एवं वृश्चिक राशि में होंगे, जिस कारण यह संयोग अतिविशिष्ट हो गया है। पौराणिक मान्‍यताओं के अनुसार इस दिन भगवान विष्‍णु (Lord Vishnu) की पूजा की जाती है और इस व्रत को करने से मनवांछित फल मिलता है। मान्‍यता है कि पूर्णिमा तिथि को ही सावित्री के पति सत्‍यवान को वट वृक्ष के नीचे जीवनदान मिला था इसलिए इसे वट पूर्णिमा कहते हैं। इस व्रत में वट की पूजा की जाती है और उसमें धागा बांधा जाता है। हम आपको इस व्रत का महत्‍व और पूजा विधि के बारे में विस्तार से बताते हैं –

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पंचांग के मुताबिक़ 24 जून को सूर्य मिथुन राशि और चंद्रमा वृश्चिक राशि में होंगे। इस वजह से यह संयोग बेहद खास है। व्रत का विधान 24 जून को है और पारण 25 जून को होगा। पूर्णिमा के दिन प्रात: काल पवित्र नदियों में स्नान करने से पुण्य की प्राप्ति होती है। यदि नदियों तक जाना संभव न हो, तो घर पर ही नहाने के पानी में गंगा जल मिलाकर स्नान कर सकते हैं।

पूजन विधि

इस दिन विधिपूर्वक भगवान विष्णु का व्रत एवं पूजन करें। संकल्प लेकर दिन भर फलाहार करते हुए व्रत रखने का विधान है। रात्रि में चंद्रमा को दूध और शहद मिलाकर अर्घ्य देने से सभी रोग एवं कष्ट दूर हो जाते हैं। व्रत का पारण अगले दिन दान करके करना चाहिए।

शुभ मुहूर्त

आरंभ : 24 जून, सुबह 3:34 बजे
समापन: 25 जून, 12: 09 बजे

पौराणिक काल से यह मान्‍यता चली आ रही है कि इसी दिन यमराज ने सावित्री के पति सत्‍यवान के प्राण लौटाए थे और उन्‍हें जीव‍ित किया था। यमराज ने इसी दिन उन्‍हें सौ पुत्रों की मां बनने का वरदान दिया था और इसी दिन सावित्री के सास-ससुर का राज-काज वापस मिलने का वरदान भी मिला था। ज्येष्ठ पूर्णिमा का स्थान 7 विशेष पूर्णिमा में आता है। इस दिन सुबह जल्‍दी स्‍नान करके भगवान विष्‍णु की पूजा करनी चाहिए और संभव हो तो व्रत करना चाहिए। रात में चंद्रमा को दूध और शहद से अर्घ्य देना चाहिए। ऐसा करने से आपकी कुंडली में चंद्रमा मजबूत होता है और आपकी सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं।

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