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NEET-UG 2026 पेपर लीक: CBI की चार्जशीट में खुलासा, NTA एक्सपर्ट्स ने रटकर होटल में पर्चियों पर लिखे थे सवाल
NEET-UG 2026 परीक्षा के पेपर लीक मामले में सीबीआई (CBI) की 94-page की चार्जशीट से बेहद चौंकाने वाली जानकारी सामने आई है। सीबीआई ने दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट में दाखिल अपनी रिपोर्ट में खुलासा किया है कि पेपर लीक की साजिश परीक्षा से कई महीने पहले रची गई थी और इसे नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) के एक्सपर्ट्स ने ही अंजाम दिया था।जांच में सामने आया है कि NTA के एक्सपर्ट्स ने पेपर तैयार करने के दौरान सवाल रटे और फिर होटल जाकर उन्हें कागज की पर्चियों पर लिखकर कोचिंग माफिया और बिचौलियों तक पहुंचाया।
होटल के कमरों में पर्चियों पर लिखे जाते थे रटे हुए सवाल
सीबीआई की चार्जशीट के अनुसार, यह पूरा घटनाक्रम 2025 के अंत से लेकर 2026 की शुरुआत का है, जब NEET के पेपर तैयार किए जा रहे थे। NTA की एक्सपर्ट मनीषा गुरुनाथ मंधारे, पीवी कुलकर्णी और मनीषा संजय हवलदार ने अपने पदों का दुरुपयोग करते हुए सवालों को याद किया। होटल लौटकर इन रटे हुए सवालों को पर्चियों पर लिखा जाता था और NCERT की किताबों में संबंधित चैप्टर व पैराग्राफ मार्क किए जाते थे, ताकि जवाब व्यवस्थित रूप से तैयार कर आगे भेजे जा सकें।
NTA ऑफिस में सुरक्षा में चूक और रफ पेपर का दुरुपयोग
जांच में NTA की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हुए हैं। NTA ऑफिस में प्रवेश करते और बाहर निकलते समय एक्सपर्ट्स की शारीरिक तलाशी नहीं ली जाती थी।
रफ शीट का खेल: एक्सपर्ट्स को रफ वर्क के लिए दिए गए सादे कागजों का दुरुपयोग किया गया। आरोपी पीवी कुलकर्णी ने इन कागजों पर केमिस्ट्री के 135 सवाल और उनके ऑप्शंस नोट किए थे और मराठी से अंग्रेजी में बैक-ट्रांसलेशन भी किया।
कोचिंग माफिया, बिचौलिए और पैसों का बड़ा खेल: सीबीआई के मुताबिक, यह साजिश केवल एक व्यक्ति तक सीमित नहीं थी, बल्कि इसमें एक्सपर्ट्स, प्राइवेट कोचिंग संचालक, बिचौलिए और कुछ छात्र शामिल थे।
निजी कोचिंग संस्थानों की संलिप्तता: चार्जशीट में ‘डॉ. अभंग प्रभु मेडिकल एकेडमी (पुणे)’ के COO तेजस हर्षदकुमार शाह, ‘रेणुकाई करियर सेंटर’ के मैनेजिंग पार्टनर शिवराज मोटेगांवकर और ‘सिद्धिविनायक हॉस्पिटल’ के मालिक डॉ. मनोज भगवानराव शिरुरे को साजिशकर्ता बनाया गया है।
सर्टिफिकेट और ब्लैंक चेक जमा: नेटवर्क इतना पक्का था कि लीक पेपर देने के बदले एक आरोपी छात्र से उसकी 10वीं-12वीं के ओरिजिनल सर्टिफिकेट और ब्लैंक चेक बतौर सिक्योरिटी जमा कराए गए थे।
डिजिटल सबूतों से बचने का तरीका: लीक सवाल व्हाट्सएप, टेलीग्राम और पीडीएफ से भेजने के अलावा कुछ कोचिंग में छात्रों से हाथ से लिखवाकर तैयारी करवाई गई, ताकि कोई डिजिटल ट्रेल (सबूत) न छूटे।
13 आरोपियों के खिलाफ केस दर्ज
सीबीआई ने मामले में 13 आरोपियों के खिलाफ केस दर्ज किया है और इनके बैंक खाते, बैंक लॉकर व डीमैट अकाउंट फ्रीज कर दिए हैं।भारतीय न्याय संहिता (BNS): आपराधिक साजिश, धोखाधड़ी, आपराधिक विश्वासघात (धारा 316(5)) के तहत आरोप दर्ज किए गए हैं, जिसमें 10 साल से लेकर आजीवन कारावास तक की सजा का प्रावधान है। लोक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) अधिनियम, 2024: धारा 11 के तहत दोष सिद्ध होने पर 7 से 10 साल की जेल और कम से कम 10 करोड़ रुपये तक के जुर्माने का कड़ा प्रावधान है।भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988: लोक सेवक के रूप में पद का दुरुपयोग करने के तहत कार्रवाई की गई है।
पंकज शर्मा
