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नियमितीकरण और मानदेय को लेकर आशा वर्करों का हल्ला बोल, सरकार को दी चेतावनी
Dharmshala Ashaworker Protest: धर्मशाला में भारतीय मजदूर संघ (BMS) के बैनर तले आशा कार्यकर्ताओं ने अपनी लंबित मांगों को लेकर डीसी ऑफिस के बाहर जोरदार विरोध प्रदर्शन किया। इस दौरान भारी संख्या में पहुंची कार्यकर्ताओं ने सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की और आक्रोश जताया। उनकी मुख्य मांगों में स्वास्थ्य विभाग में नियमितीकरण, न्यूनतम मासिक मानदेय 18,000 रुपये तय करना , सभी कार्यकर्ताओं को ईपीएफ (EPF), ईएसआई (ESI) समेत सरकारी मुफ्त चिकित्सा और जीवन बीमा का लाभ और 24 घंटे की ड्यूटी के बजाय काम के घंटे और कार्यक्षेत्र (Area) तय करना शामिल है।
‘स्वास्थ्य विभाग की रीढ़ का हो रहा शोषण’
आंदोलन का नेतृत्व कर रहे भारतीय मजदूर संघ के प्रांतीय पदाधिकारियों ने जनसभा को संबोधित करते हुए कहा कि स्वास्थ्य विभाग की रीढ़ मानी जाने वाली आशा कार्यकर्ताओं का लंबे समय से आर्थिक शोषण किया जा रहा है, जिसे अब और बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। संघ के मुख्य सचिव ने कहा कि कोरोना काल से लेकर सामान्य दिनों तक, राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के हर जमीनी स्तर के काम और टीकाकरण अभियानों को सफल बनाने में आशा कार्यकर्ताओं की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण रहती है। इसके बावजूद उन्हें बेहद कम प्रोत्साहन राशि देकर काम करने पर मजबूर किया जा रहा है। सरकार उन्हें सिर्फ ‘मानदेय कर्मी’ मानकर न्यूनतम वेतन कानूनों के दायरे से बाहर रख रही है, जो कि पूरी तरह से अन्यायपूर्ण है।
2 घंटे तक चक्का जाम, सीएम को भेजा 7 सूत्रीय मांग पत्र
दोपहर बाद आशा कार्यकर्ताओं के एक प्रतिनिधिमंडल ने डीसी से मुलाकात की और सीएम के नाम एक 7 सूत्रीय मांग पत्र सौंपा। इस विशाल प्रदर्शन और रैली के कारण कलेक्ट्रेट मार्ग पर करीब 2 घंटे तक यातायात पूरी तरह बाधित रहा, जिससे राहगीरों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा। स्थिति को नियंत्रित करने के लिए मौके पर भारी पुलिस बल तैनात रहा। मजदूर संघ ने सरकार को दो टूक चेतावनी दी है कि यदि आगामी बजट सत्र से पहले आशा कार्यकर्ताओं की जायज मांगों पर कोई सकारात्मक फैसला नहीं लिया गया, तो पूरे प्रदेश में स्वास्थ्य सेवाओं का पूर्ण बहिष्कार कर दिया जाएगा और सभी कार्यकर्ता अनिश्चितकालीन हड़ताल पर चली जाएंगी।
रविंद्र चौधरी
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