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हिमाचल के एंट्री टैक्स का विरोध उग्र: निहंग सिखों ने बॉर्डर पर लगाया समानांतर ‘खालसा टैक्स नाका’
Himachal Entry Tax Protest: हिमाचल प्रदेश सरकार द्वारा राज्य की सीमाओं पर बाहरी वाहनों के लिए लगाए गए प्रवेश कर (टोल नाकों) का विवाद अब उग्र रूप ले चुका है। लंबे समय से चल रहे विरोध-प्रदर्शन का कोई ठोस परिणाम न निकलता देख, शिरोमणि जरनैल साहिबजादा बाबा जुझार सिंह निहंग सिंह खालसा दल ने कानून को अपने हाथ में लेते हुए एक बड़ा कदम उठाया है। दल ने अपने पूर्व निर्धारित कार्यक्रम के तहत गरामोड़ा में एक समानांतर ‘खालसा एंट्री टैक्स नाका’ स्थापित कर दिया है। इस नाके पर बाकायदा हिमाचल प्रदेश नंबर वाली गाड़ियों को रोककर उनसे ‘खालसा टैक्स’ की वसूली शुरू कर दी गई है। बॉर्डर पर अचानक हुई इस नाकाबंदी और टैक्स वसूली के कारण फिलहाल सीमांत क्षेत्र के लोगों और वाहन चालकों में दहशत का माहौल है।
नाके पर कैसे हो रही है वसूली?
स्वैच्छिक भुगतान: हालांकि घोषणा में वाहन चालकों से ₹100 से ₹500 तक वसूलने की बात कही गई थी, लेकिन मौके पर चालकों की इच्छा के अनुसार ही पैसे लिए जा रहे हैं।
कोई जबरदस्ती नहीं: यदि कोई वाहन चालक इस टैक्स का विरोध करता है या पैसे देने से मना करता है, तो उससे किसी भी तरह की बहस या जोर-जबरदस्ती नहीं की जा रही है और उसे शांतिपूर्वक जाने दिया जा रहा है।
फंड का उपयोग: निहंग सिंह संगठन तरना दल के प्रतिनिधि बाबा अछर सिंह ने स्पष्ट किया कि इस टैक्स से एकत्रित होने वाली राशि का उपयोग ‘सरबत के भले’ (सबके कल्याण) और अन्य सामाजिक कार्यों के लिए किया जाएगा।
दोनों राज्यों की सरकारों को खुली चेतावनी
निहंग संगठनों ने स्पष्ट कर दिया है कि यह कदम हिमाचल सरकार को नींद से जगाने के लिए उठाया गया है। उनका कहना है कि जब तक हिमाचल सरकार प्रवेश शुल्क को पूरी तरह से वापस नहीं ले लेती, यह आंदोलन और ‘खालसा टैक्स’ की वसूली जारी रहेगी।इसके साथ ही जत्थेबंदियों ने पंजाब सरकार को भी चेतावनी दी है कि यदि उसने पंजाबियों के हित में इस मुद्दे पर जल्द कोई ठोस कदम नहीं उठाया, तो इस आंदोलन को और अधिक व्यापक रूप दिया जाएगा।
सुभाष.

