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इस गांव में ना बिजली ना मोबाइल, वैदिक जीवन जी रहे हैं यहां पर लोग

लोगों की दिनचर्या सुबह साढ़े तीन बजे ही शुरू हो जाती है

इस गांव में ना बिजली ना मोबाइल, वैदिक जीवन जी रहे हैं यहां पर लोग

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मोबाइल व इंटरनेट के दौर में हम सभी सुख-सुविधाओं से घिरे हुए हैं। हम पांच मिनट भी इन सुविधाओं के बगैर नहीं रहे सकते है। जरा सोचिए जब ये सुविधाएं नहीं थी तो लेग कैसे रहते थे। लेकिन आज के समय के साथ इन्हें हम लोगों ने अपनी जरूरत बना लिया है। आज हम आप को एक ऐसे गांव के बारे में बता रहे हैं बिजली तक नहीं है मोबाइल व इंटरनेट तो दूर की बात है। घर पर कोई आधुनिक उपकरण नहीं। यहां तक कि खाना भी चूल्हे पर बनता है। मनोरंजन के लिए ना टीवी, ना रेडियो. किसी को कहीं बात करनी हो तो पूरे गांव में मात्र एक लैंडलाइन फोन है बस।


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आप हैरान हो रहे हैं कि आज के दौर में ऐसा गांव हो सकता है। ये गांव हमारे देश में ही है और आईटी हब कहे जाने वाले आंध्रप्रदेश के श्रीकाकुलम जिले में पड़ता है। गांव का नाम कुर्माग्राम है। इस गांव में 14 परिवार रहते हैं, जिन्होंने कृष्ण भक्ति में अपना जीवन समर्पित कर दिया है। यहां के लोगों ने खुद ही सबकुछ त्याग रखा है। कोई भौतिक सुविधाएं नहीं। बस सादा जीवन, उच्च विचार। शहर से मात्र करीब 6 किलोमीटर दूर कुर्माग्राम विदेशियों के लिए तो पर्यटन स्थल जैसा है। यहां लोगों के घर नौवीं शताब्दी के भगवान शअरीमुख लिंगेश्वर मंदिर की तर्ज पर बने हुए हैं।

village

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गांव के लोगों की दिनचर्या सुबह साढ़े तीन बजे ही शुरू हो जाती है और शाम साढ़े सात बजे तक लोग सो भी जाते हैं। अपने खाने के लिए अनाज और सब्जियां लोग खुद ही उगाते हैं। खेती करने के अलावा लोग यहां गायें पालते हैं। गोबर के उपले बनाकर उसे चूल्हे में जलाकर, खाना उसी पर पकाया जाता है.। यहां जो लोग कपड़े पहनते हैं, वो खुद ही बुनते हैं।
गांव में एक गुरुकुल है, जहां गणित, विज्ञान, संस्कृत, तेलुगु, हिंदी, अंग्रेजी, संस्कृत, कला जैसे विषयों के साथ ही बच्चों को नैतिक शिक्षा भी दी जाती है। बच्चों को धर्मग्रंथ भी पढ़ाए जाते है। कबड्डी से लेकर तैराकी तक यहां पर हर तरह की शारीरिक गतिविधियां कराई जाती हैं। इस गांव को देखने के लए दूर-दूर से लोग आते हैं।यहां तक कि ऐसे विदेशी भी हैं जो यहां आकर बस गए और यहीं के अनुसार अपना जीवन यापन कर रहे हैं।

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