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दुनिया के इन देशों नहीं बहती एक भी नदी, फिर कैसे जिंदा है करोड़ों लोग
Countries Without Rivers : नदियां किसी भी देश के जीवन का आधार मानी जाती हैं, क्योंकि वे पेयजल, सिंचाई, कृषि, औद्योगिक उपयोग और जलविद्युत उत्पादन का मुख्य स्रोत हैं। वे न केवल सभ्यताओं की जीवनरेखा हैं, बल्कि पर्यावरण का संतुलन बनाए रखने और जैव विविधता को सहारा देने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। नदियां जीवन का आधार हैं। शायद इसी वजह से हमारी भारतीय संस्कृति में नदियों को माता कह कर पूजा जाता है। लेकिन आपको जानकर हैरानी होगी कि दुनिया में कई ऐसे देश भी हैं जहां एक भी प्राकृतिक नदी नहीं बहती। ये देश या तो बेहद शुष्क और रेगिस्तानी इलाकों में मौजूद हैं या फिर इतने छोटे द्वीप हैं कि वहां नदी बनने की स्थिति ही नहीं बनती। इन देशों में लाखों लोग रहते हैं और मॉर्डन तकनीक की मदद से अपनी पानी की जरूरतें पूरी करते हैं। चलिए आज आप को इन देशों के बारे में बताते हैं….

सऊदी अरब दुनिया का सबसे बड़ा ऐसा देश है जहां एक भी नदी नहीं है। यहां का ज्यादातर हिस्सा रेगिस्तान से ढका हुआ है और बारिश बहुत कम होती है। पानी की जरूरतों को पूरा करने के लिए ये देश बड़े पैमाने पर समुद्री पानी को साफ करने यानी डिसैलिनेशन तकनीक का इस्तेमाल करता है। इसके अलावा यहां अंडरग्राउंड वॉटर का भी इस्तेमाल किया जाता है, जिससे शहरों और उद्योगों की पानी की मांग पूरी होती है।

कुवैत, कतर और UAE जैसे देशों में भी कोई स्थायी नदी नहीं है। इन देशों का क्लाइमेट बेहद हॉट एंड ड्राई है, जिसकी वजह से यहां प्राकृतिक जल स्रोत बहुत सीमित हैं। पानी की आपूर्ति के लिए ये देश एड्वांस्ड डिसैलिनेशन प्लांट्स पर निर्भर हैं और साथ ही पानी के संरक्षण पर भी खास ध्यान देते हैं, ताकि भविष्य में पानी की कमी से बचा जा सके।

लीबिया अफ्रीका का सबसे बड़ा ऐसा देश है जहां एक भी नदी नहीं है। इस देश का लगभग 90 प्रतिशत हिस्सा सहारा रेगिस्तान में आता है, जहां बारिश बेहद कम होती है। यहां के लोग मुख्य रूप से अंडर वॉटर सोर्स यानी एक्विफर्स पर निर्भर रहते हैं। इसके अलावा, बड़े स्तर पर पाइपलाइन प्रोजेक्ट्स के जरिए दूर-दराज इलाकों तक पानी पहुंचाया जाता है।

वेटिकन सिटी और मोनाको जैसे छोटे देशों में नदियों का ना होना आम बात है, क्योंकि इनका एरिया बहुत ही सीमित है। यहां नदी बनने के लिए न तो पर्याप्त जगह है और न ही जल स्रोत। इन देशों की पानी की जरूरतें पड़ोसी देशों से पूरी की जाती हैं और मॉडर्न वॉटर सप्लाई सिस्टम के जरिए नागरिकों तक पानी पहुंचाया जाता है।

मालदीव, नौरू और तुवालु जैसे छोटे द्वीपीय देशों में भी कोई नदी नहीं है। इन देशों का आकार छोटा है और यहां स्थायी जलधाराएं बनने की संभावना कम होती है। यहां के लोग रेन वॉटर हार्वेस्टिंग और अंडरग्राउंड वॉटर का इस्तेमाल करते हैं। इसके अलावा कुछ जगहों पर समुद्री पानी को भी साफ करके इस्तेमाल में लाया जाता है।
पंकज शर्मा
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