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जय मां नैना देविया री, जय बजिये बाबे री, अज अऊं धन्य होई गेया : पीएम का पहाड़ी अंदाज
बिलासपुर। पीएम नरेंद्र मोदी (PM Narendra Modi) आज बिलासपुर (Bilaspur) जिला में पहुंचे। अब पीएम पहाड़ में पहुंचे तो उनका अंदाज भी पहाड़ी नजर आया। भाषा का लहजा भी पहाड़ी रहा। हालांकि पीएम गुजरात (Gujarat) के रहने वाले हैं और वहां की भाषा में सिदहस्त होंगे, मगर पहाड़ में आकर जब उन्होंने बिलासपुर की बोली के लफ्ज अपने मुंह से बयां किए तो तालियों की गड़गड़ाहट तो गूंजी ही साथ में कई के मुंह से वाह शब्द भी निकला। हालांकि ये शब्द लिखे लिखाए थे, जिन्हें पीएम ने माइक पर उच्चारण (Pronunciation on Mike) किया मगर प्रयास तो किया। सबसे पहले उन्होंने मां नयना देवी का जयकारा बिलासपुरी अंदाज में लगाया। उनके बोल थे- जय मां नैना देविया री, जय बजिये बाबे री। अज अऊं धन्य होई गेया। अज मिंजो दशहरे रे इस पावन मौके पर मां नयना देविया रा आशीर्वाद लैणे दा मौका मिलेया। कनै एम्स री तुसां जो बड़ी-बड़ी बधाई। बिलासपुर दी पहचान हुण. कहलूरा दी बंदले धारा ऊपर हाइड्रो इंजीनियरिंग कॉलेज कने थले एम्स। अब इन शब्दों की अहमियत देखी जाए तो बहुत खास है। एक तरीके से पीएम मोदी ने यह दर्शाने का प्रयास किया है कि समस्त भारत से उनका लगाव है। वह कहीं भी जाएं और वहां की भाषा कैसी भी हो वह उसे बोल सकते हैं। उससे आत्मसात हो सकते हैं (Can be Absorbed) । वहां रम सकते हैं।
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पीएम का यह अंदाज और शैली देखकर हर कोई कायल तो हुआ ही, हतप्रभ भी रह गया। पीएम ने इस मौके पर कहा कि हिमाचल वीरों की धरती हैफ। मैंने यहां की रोटी खाई है और मुझे यहां का कर्ज उतारना है। उन्होंने कहा कि हिमाचल प्रदेश में मेडिकल टूरिज्म की अपार संभावनाएं हैं। उन्होंने कहा कि जब विदेशों के लोग इन खूबसूरत वादियों (Beautiful Valleys) में आएंगे तो वह निरोग होकर तो जाएंगे ही, साथ में खूबसूरत वादियां भी देख सकेंगे। हिमाचल के तो दोनों हाथों में लड्डू हैं। उन्होंने कहा कि पूर्व सरकार की विकृत सोच थी कि अच्छी सड़कें, शिक्षण संस्थान, अस्पताल, उद्योग दिल्ली (Delhi) और बड़े शहरों में ही होंगे। अब देश आधुनिक सोच से आगे बढ़ रहा है। स्वास्थ्य सुविधाओं के लिए प्रदेश अभी टीएमसी पर ही निर्भर था। केंद्रीय विविए आईआईएमए आईआईटीए आईआईआईटी और अब एम्स हिमाचल की शान बढ़ा रहा है। पूर्व सरकार शिलान्यास का पत्थर लगाती थी और चुनाव के बाद भूल जाती थी। अटकनाए लटकना और भटकना का जमाना चला गया। ऊना के पास रेलवे लाइन बिछानी थी। रिव्यू कर रहा था तो देखा कि 35 साल पहले फैसला हुआ था। मैं हिमाचल का बेटा हूंए हिमाचल को कैसे भूल सकता हूं।


