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15 साल बाद भी ताजा हैं यादें….. सचिन तेंदुलकर ने वनडे वर्ल्ड कप 2011 की जीत को ऐसे किया याद
Sachin Tendulkar 15th anniversary of 2011 World Cup Win: हर क्रिकेटर अपने देश को विश्व कप जिताने का चाह रखता है। मास्टर ब्लास्टर सचिन तेंदुलकर का भी यही सपना था। लेकिन इसे साकार करने में उन्हें 22 साल लग गए। करियर के अंतिम चरण में आकर सचिन तेंदुलकर ने आखिरकार वह सपना पूरा किया। आज ही के दिन, 2 अप्रैल 2011 को महेंद्र सिंह धोनी की कप्तानी में भारतीय टीम ने 28 साल बाद वनडे विश्व कप का खिताब अपने नाम किया था। आज इस जीत को पूरे 15 साल हो चुके हैं। भारतीय टीम को वनडे विश्व कप 2011 में चैंपियन बनाने में सचिन तेंदुलकर की अहम भूमिका रही थी। इस ऐतिहासिक सफलता के 15 साल पूरे होने पर तेंदुलकर ने एक्स पर एक भावुक वीडियो पोस्ट की है जिसमें वह बल्लेबाजी करते हुए दिख रहे हैं।
इंडिया के लिए विश्व कप जीतना
तेंदुलकर ने कैप्शन में लिखा है, “पहली गेंद हमेशा आपके दिल की धड़कन बढ़ा देती है, और उस रात, यह कभी नहीं रुका। 15 साल बाद भी, यह हमारे साथ है। हम सभी युवा क्रिकेटरों के एक ग्रुप के तौर पर बड़े हुए, एक ही सपने से जुड़े हुए। इंडिया के लिए विश्व कप जीतना।” उन्होंने लिखा, “इस सफर का हिस्सा रहे सभी लोगों और सभी फैन्स को इसे हमारे साथ शेयर करने और इसे इतना खास बनाने के लिए धन्यवाद। जय हिंद।”
The first ball always makes your heart race… and that night, it never stopped.
15 years later, it still stays with us. We all grew up as a bunch of young cricketers, united by one dream. To win the World Cup for India.
To everyone who was a part of the journey, and to all the… pic.twitter.com/rW141yJraF
— Sachin Tendulkar (@sachin_rt) April 2, 2026
22 साल बाद 2 अप्रैल 2011 को पूरा हुआ था सपना
सचिन तेंदुलकर ने नवंबर 1989 में अपने अंतरराष्ट्रीय करियर का आगाज किया था। तेंदुलकर के विश्व कप जीतने का सपना उनके डेब्यू के 22 साल बाद 2 अप्रैल 2011 को पूरा हुआ था, जब एमएस धोनी की कप्तानी वाली टीम इंडिया ने मुंबई के वानखेड़े स्टेडियम में फाइनल में श्रीलंका को हराकर विश्व कप जीता था। भारतीय टीम का यह दूसरा वनडे विश्व कप था।भारत को वनडे विश्व कप 2011 में चैंपियन बनाने में सचिन तेंदुलकर की अहम भूमिका रही थी। तेंदुलकर टूर्नामेंट के दूसरे श्रेष्ठ स्कोरर रहे थे। तेंदुलकर ने 9 मैचों की 9 पारियों में 2 शतक और 2 अर्धशतक लगाते हुए 482 रन बनाए थे। शीर्ष पर श्रीलंका के तिलकरत्ने दिलशान थे, जिन्होंने 9 मैचों में 500 रन बनाए थे।
पंकज शर्मा
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