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हिमाचलः करोड़ों रुपए के घोटले का पर्दाफाश, पूर्व मेयर-ईओ पर केस

विजिलेंस ने शिकायत मिलने पर की कार्रवाई

हिमाचलः करोड़ों रुपए के घोटले का पर्दाफाश, पूर्व मेयर-ईओ पर केस

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धर्मशाला। विजिलेंस (Vigilance) ने धर्मशाला में करोड़ों रुपए के घोटाले का पर्दाफाश किया है। धर्मशाला नगर निगम (Dharamshala Municipal Corporation) के पूर्व मेयर और कांग्रेस नेता देवेंद्र जग्गी और नगर परिषद धर्मशाला (Dharamshala) के तत्कालीन ईओ महेश दत्त शर्मा पर धोखाधड़ी सहित अन्य धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया है। तत्कालीन ईओ महेश दत्त शर्मा पर गलत तरीके से सरकारी खजाने को नुकसान पहुंचाने का आरोप है। इसके साथ ही पूर्व मेयर देवेंद्र जग्गी पर बेईमानी कर व्यर्थ लाभ देने के आरोप लगे हैं। मामला विजिलेंस थाना धर्मशाला में आज दर्ज किया गया है। मामला तत्कालीन नगर परिषद के कार्यालय के साथ मुख्य सड़क पर बने भवन से जुड़ा है।

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विजिलेंस को मामले की शिकायत मिली थी। विजिलेंस ने मामले जांच की और जांच रिपोर्ट विजिलेंस हैड क्वार्टर शिमला (Vigilance Head Quarter Shimla) को सौंपी। अब सरकार से नगर परिषद धर्मशाला के तत्कालीन ईओ महेश दत्त शर्मा के खिलाफ सरकार से अंडर सेक्शन 17ए ऑफ पीसी एक्ट के तहत मामले दर्ज करने की मंजूरी मिल गई है। इसके बाद विजिलेंस ने मामला दर्ज कर लिया है। मामला दर्ज होने की जानकारी एएसपी कम एसएचओ विजिलेंस थाना धर्मशाला (ASP cum SHO Vigilance Station Dharamshala) बलबीर सिंह जसवाल ने की है।

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आरोप है कि वर्ष 2005 के दौरान यह निर्माणाधीन भवन निविदा नोटिस में सुरक्षा राशि और किराए का उल्लेख किए बिना देविंदर सिंह जग्गी को पट्टे पर दी गई। इसमें नियमों का जमकर उल्लंघन हुआ। जांच में पता चला कि पूर्व मेयर देवेंद्र सिंह जग्गी द्वारा भवन का कब्जा लेने के बाद पहली मंजिल आईसीआईसीआई बैंक (ICICI Bank) और अन्य मंजिल बजाज एलाइंस इंशोरेंस कंपनी (Bajaj Alliance Insurance Company) को लीज पर दी गई। आईसीआईसीआई बैंक को 14 दिसंबर 2006 से 31 दिसंबर 2019 तक पहली मंजिल लीज पर दी गई। साथ ही एक करोड़ 21 लाख 46 हजार 649 रुपए वसूल किए गए। बजाज एलाइंस को 1 जनवरी 2009 से 31 दिसंबर 2019 तक 39 लाख 47 हजार 971 रुपए रेट वसूल किया गया। दोनों का एक करोड़ 60 लाख 94 हजार 620 रुपए रेंट वसूला गया। खुद उन्होंने एमसी धर्मशाला को 31 दिसंबर 2019 तक 18 लाख 38 हजार 869 जमा करवाया गया। इस समय भी वो नगर निगम के पार्षद हैं।

बता दें कि नगर निगम के ही एक पार्षद द्वारा इस घोटाले पर विजिलेंस को शिकायत की गई थी। इसके बाद स्टेट विजिलेंस व एंटी क्रप्शन ब्यूरो ने मामले की गहनता से जांच की। विजिलेंस के अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक बलबीर सिंह जसवाल ने पूर्व मेयर व तत्कालीन कार्यकारी अधिकारी के खिलाफ धोखाधड़ीए षडयंत्र रचने व भ्रष्टाचार को लेकर पीसी एक्ट की धाराओं में मामला दर्ज होने की पुष्टि की है।

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