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Happy Birthday Shanta Kumar: जानें पंच से केंद्रीय मंत्री बनने तक की पूरी कहानी

पत्नी के वियोग में शांता कुमार ने नहीं मनाया अपना जन्मदिन

Happy Birthday Shanta Kumar: जानें पंच से केंद्रीय मंत्री बनने तक की पूरी कहानी

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कांगड़ा। हिमाचल के पूर्व सीएम और केंद्रीय मंत्री शांता कुमार (Shanta Kumar) आज 87 साल को हो गए हैं। हालांकि, वे इस साल अपना जन्मदिन नहीं मना रहे हैं। जीवन के इस पड़ाव में उन्होंने अपना सबसे पक्का साथी को खो दिया है। कोविड 19 महामारी के चलते उनकी पत्नी संतोष का कुछ महीने पहले निधन हो गया था। वहीं, आज उन्हें कई लोगों ने बधाइयां भी दी है। बहुत से लोगों व नेता और कार्यकर्ताओं ने अपने फेसबुक अकाउंट व अन्य माध्यमों से शांता कुमार के प्रति अपना प्रेम, स्नेह व अपनापन जताया है।

12 सितंबर 1934 को हुआ जन्म

12 सितंबर 1934 को कौशल्या शर्मा ने एक बेटे को जन्म दिया। पिता जगन्नाथ शर्मा और परिवार वालों ने उनका नाम रखा शांता। लेकिन शांता नाम रखने के बावजूद उन्होंने अपने राजनीतिक कैरियर में कभी नरमी नहीं दिखाई। हमेशा विरोधियों पर शांता कुमार गर्म रहे। उन्होंने पंच के चुनाव से राजनीति की शुरुआत की थी। शांता कुमार ने 1963 में पहली बार गढ़जमूला पंचायत से जीत दर्ज की थी। उसके बाद वह पंचायत समिति के भवारना से सदस्य नियुक्त किए गए। बाद में वे 1965 से 1970 तक कांगड़ा जिला परिषद के अध्यक्ष भी रहे।

1977 में पहली बार बने चीफ मिनिस्टर 

लेकिन सिसायत में लंबी कूद लगाने की बारी इमरजेंसी के बाद आई। एंटी इंदिरा मूवमेंट के दौरान उनका सिक्का चल गया। बिहार के पटना के गांधी मैदान से उठी जेपी मूवमेंट ने हिमाचल में भी कांग्रेस की नींव हिलाकर रख दी थी। 1977 में हुए विधानसभा चुनाव में भारतीय जनसंघ ने कांग्रेस को धूल चटा दी। 1977 में जनसंघ सत्ता में आई और शांता कुमार पहले गैर कांग्रेसी चीफ मिनिस्टर बने। उसके बाद साल 1985 में वे असेंबली चुनाव हार गए। इसके बाद वे 1986 से 1990 तक प्रदेश बीजेपी के अध्यक्ष पद पर रहे।

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1990 में फिर जीते चुनाव 

फिर आगामी फरवरी 1990 में इनको पालमपुर और सुलह निर्वाचन क्षेत्रों से जीत मिली तो दोबारा भारतीय जनता पार्टी के नेता चुने गए। और सीएम बन गए। वे 5 मार्च 1990 से 25 दिसंबर,1992 मुख्यमंत्री के पद पर रहे। 1993 में उन्होंने सुलह विधानसभा क्षेत्र से चुनाव लड़ा। पर हार गए।

अटल सरकार में रहे केंद्रीय मंत्री 

इसके बाद से शांता कुमार ने प्रदेश की राजनीति छोड़ केंद्र की राजनीति में कदम रखा।अटल बिहारी वाजपेयी सरकार के वक्त बतौर केंद्रीय मंत्री लोगों की सेवा की। उसके बाद उनका अधिकतर राजनीतिक कैरियर केंद्रीय स्तर पर रहा। उन्होंने आखिरी बार 2014 में कांगड़ा से लोकसभा चुनाव लड़ा और जीत दर्ज की। वहीं, 75 का कांटा क्रॉस करने के कारण उन्होंने 2019 में चुनाव नहीं लड़ा। 2019 के बाद से उनका अधिकतर काम शैक्षणिक तरफ रहा। शांता कुमार ने कई किताबें और कहानियां लिखीं हैं।

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