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हिमाचल: आज के दिन 1971 की जंग में पाक के 93 हजार सैनिकों ने टेके थे घुटने, किया था आत्मसमर्पण

पूर्व सैनिकों ने मनाया 1971 के युद्ध का विजय दिवस, शहीदों को दी गई श्रद्धांजलि

हिमाचल: आज के दिन 1971 की जंग में पाक के 93 हजार सैनिकों ने टेके थे घुटने, किया था आत्मसमर्पण

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हिमाचल अभी अभी। हिमाचल में आज भारत पाकिस्तान (Pakistan) के साथ 1971 की जंग की जीत के 50 वर्ष पूरे होने पर विजय दिवस (Vijay Diwas) मनाया जा रहा है। पूरे देश में इस बात पर हर्षोल्लास है। वहीं देश सहित हिमाचल में भी आज उन शहीदों को भी याद किया जा रहा हैं। जिन्होंने इस युद्ध में अपने जीवन का वलिदान दिया था। बता दें कि आज ही के दिन यानी 16 दिसंबर 1971 को भारत ने पाकिस्तान को जंग में करारी शिकस्त दी थी और इसके फलस्वरूप बांग्लादेश का उदय हुआ। भारतीय सेना (Indian Army) की जांबाजी के आगे पाकिस्तानी सेना ने महज 13 दिन में ही घुटने टेक दिए थे। इस युद्ध में पाकिस्तान के 93 हजार सैनिकों ने भारतीय सेना के सामने आत्मसमर्पण किया था। यह इतिहास में दूसरे विश्वयुद्ध के बाद का सबसे बड़ा सैन्य आत्मसमर्पण माना जाता है। इस युद्ध मेे देश के 3843 शूरवीरों ने शहादत का जाम पिया था और 9851 सैनिक घायल हुए थे। इसमें हिमाचल के 190 सैनिकों ने इस युद्ध में अपने प्राणों की आहुति दी थी, जिनमें मंडी जिला के 21 शूरवीर शामिल थे। इस युद्ध में सेना की पूर्वी कमान के आर्मी कमांडर लेफ्टिनेंट जनरल जगजीत सिंह अरोड़ा के सामने पाकिस्तान के लेफ्टिनेंट जनरल एएके नियांजी ने लगभग 93 हजार सैनिकों के साथ आत्मसमर्पण किया था। उसी दिन से हर वर्ष 16 दिसंबर को भारत.पाक युद्ध विजय दिवस के रूप में मनाया जाता है। इसी जीत का जश्न आज हिमाचल के हर जगह मनाया जा रहा है। इसी जीत का जश्न आज हिमाचल के हर जगह मनाया जा रहा है।

ऊना में मनाया गया विजय दिवस

हिमाचल के ऊना जिला मुख्यालय के एमसी पार्क स्थित शहीद स्मारक पर गुरुवार को पूर्व सैनिकों द्वारा 1971 के युद्ध (1971 war) के विजय दिवस के रूप में एक कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस मौके पर पूर्व सैनिकों और पूर्व सैन्य अधिकारियों ने इस युद्ध में वीरगति पाने वाले शहीदों के साथ-साथ हाल ही में शहीद हुए भारत के सेना अध्यक्ष सीडीएस बिपिन रावत (CDS Bipin Rawat) और अन्य शहीदों को भी श्रद्धा सुमन अर्पित किए। 1971 के युद्ध की यादों को ताजा करते हुए पूर्व सैनिकों ने इसे भारत की गौरवमई जीत करार दिया। उन्होंने कहा कि आज के दिन 1971 में भारतीय वीर सैनिकों ने पाकिस्तान के करीब 93000 सैनिकों को घुटने टेकने पर मजबूर कर दिया था। हालांकि पूर्व सैनिकों ने यह सब महान दिवस के मौके पर नेताओं की गैरमौजूदगी बहुत दुर्भाग्यपूर्ण भी करार दिया।

धर्मशाला के शहीद स्मारक में याद किए 1971 के जांबाज सिपाही

धर्मशाला। राज्य शहीद स्मारक धर्मशाला (State Martyrs Memorial Dharamshala) में विजय दिवस पर शहीदों को श्रद्धांजलि (Tribute) दी गई तथा शहीदों की शहादत और सैनिकों के जज्बे को सलाम किया गया। मेजर जरनल मनोज तिवारी ने कहा कि देश का नागरिक जांबाज जवानों के कारण ही सुरक्षित है। हिमाचल की धरती वीर सपूतों की धरती है। उन्होंने कहा कि हमारा जो यूवा वर्ग है वे इस कार्यक्रम से प्रेरणा ले तथा भारतीय सेना में भर्ती होकर देश की सेवा करे। उन्होंने कहा कि वर्ष 1971 को भारत-पाकिस्तान युद्ध के दौरान 16 दिसंबर जिन सैनिकों ने भारत देश की रक्षा के लिए अपने प्राणों का बलिदान दिया है उसे कभी भुलाया नही जा सकता। इस युद्ध के अंत में 93 हजार पाकिस्तानी सैनिकों ने आत्मसमर्पण कर दिया था और भारत ने पाकिस्तान को करारी शिकस्त दी। विजय दिवस के मौके पर भारत माता का पूजन किया। इस मौके पर दीप प्रज्ज्वलन कर विजय दिवस के रूप में मनाया गया साथ ही शहीद हुए भारत के वीर सपूतों की गौरव गाथा को याद कर उन्हें नमन किया गया। इस अवसर पर भूतपूर्व सैनिकों ने भी कार्यक्रम में भाग लिया।

मंडी में 1971 भारत.पाक युद्ध के रणबांकुरों को दी गई श्रद्धांजलि

मंडी। भारत-पाक युद्ध का 50वां विजय दिवस समारोह जहां पूरे देश में मनाया गया। इस मौके पर मंडी शहर के संकन गार्डन में स्थित युद्ध स्मारक में एक्स सर्विसमैन लीग, हिमाचल प्रदेश डिफेंस वूमेन वेलफेयर एसोसिएशन व मंडी जिला भाषा एवं संस्कृति विभाग के संयुक्त तत्वावधान में एक कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में युद्ध सेवा मेडल से सम्मानित व कारगिल वार के हीरो रहे रिटायर ब्रिगेडियर खुशाल ठाकुर ने बतौर मुख्य अतिथि शिरकत की। इस मौके पर पूर्व सैनिकों व वीर नारियों द्वारा दो मिनट का मौन रखकर वर्ष 1971 में हुए भारत-पाक युद्ध में शहादत का जाम पीकर सर्वोच्च बलिदान देने वाले शहीदों को याद कर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की गई। इस मौके पर रिटायर्ड ब्रिगेडियर खुशाल ठाकुर ने शहीदों को श्रद्धांजलि देते हुए कहा कि यह युद्ध 3 दिसंबर से 16 दिसंबर 1971 तक चला था जिसमें देश के साथ हिमाचल प्रदेश के मंडी जिला से भी जवानों ने शहादत दी है जिसे देश कभी नहीं भुला सकता। उन्होंने कहा कि 16 दिसंबर 1971 को भारतीय सेना ने पाकिस्तान की हजारों की संख्या में सेना को आत्मसमर्पण के लिए मजबूर कर दिया। उन्होंने विजय दिवस की गोल्डन जुबली पर सभी को बधाई भी दी।

हमीरपुर में डोगरा रेजिमैंट ने बैंड द्वारा दी मनमोहक प्रस्तुति

हमीरपुर। 1971 के विजय दिवस के उपलक्ष में आज हमीरपुर के गांधी चौक पर भव्य समारोह का आयोजन किया गयाए जिसमें सैकड़ों की तादाद में भूतपूर्व सैनिकों ने अपनी उपस्थिति दर्ज करवाई। इस कार्यक्रम में पूर्व मंत्री एवं विधायक कर्नल धनीराम शांडिल बतौर मुख्य अतिथि शामिल हुए। इस अवसर पर डोगरा रेजिमैंट 6 के सेना के बैंड द्वारा मनमोहक प्रस्तुति भी दी गई। हमीरपुर के भोटा चौक से गांधी चौक तक पूर्व सैनिकों ने मार्च भी निकाला। इस अवसर पर 1971 में सैनिकों द्वारा दी गई कुर्बानियों को याद किया गया तथा विभिन्न सैनिकों द्वारा 1971 के युद्ध में दिए गए शौर्य पूर्ण योगदान को याद किया गया इस अवसर पर मेरे पूर्व सैनिकों तथा वीरवधुओं को भी सम्मानित किया गया।

देशभक्ति के रंग में सराबोर हुआ नाहन का चौगान मैदान

 

 

नाहन। आज भारत विजय दिवस मना रहा है। इसी कड़ी में जिला मुख्यालय नाहन के चौगान मैदान में भी पूर्व सैनिक संगठन द्वारा विजय दिवस पर कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम में हिमाचल प्रदेश निजी शिक्षण संस्थान विनिमायक आयोग के अध्यक्ष रिटायर्ड मेजर जनरल अतुल कौशिक ने बतौर मुख्यातिथि शिरकत की। कार्यक्रम में पूर्व सैनिकों समेत सैकड़ो की संख्या में स्थानीय लोगों ने भाग लिया। कार्यक्रम में स्थानीय कलाकारों एवं स्कूली बच्चों द्वारा देशभक्ति से सराबोर प्रस्तुतियां भी प्रस्तुत की गई। इस अवसर पर अपने कार्यकाल में उत्कृष्ठ कार्य करने वाले सेवानिवृत्त सैनिकों को सम्मानित किया गया।

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