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कल होगा फतेहपुर संग्राम: त्रिकोणीय मुकाबले में कल कौन मारेगा बाजी, जानें सियासी इतिहास की पूरी कहानी

राजन सुशांत , बलदेव ठाकुर और भवानी पठानिया की किस्मत कल होगी ईवीएम में कैद

कल होगा फतेहपुर संग्राम: त्रिकोणीय मुकाबले में कल कौन मारेगा बाजी, जानें सियासी इतिहास की पूरी कहानी

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फतेहुपर। फतेहपुर की सियासत में दो हस्तियों ने सन 1977 से 2021 तक राज किया है। एक की जिंदगी की डोर टूट गई है, जबकि दूसरा खुद पार्टी से बगावत करने के बाद सियासी नेपथ्य में चला गया। आज फतेहपुर एक बार फिर उस मुहाने पर खड़ा है। जहां वह 4 दशक पहले खड़ा था। अब फतेहपुर को फतह करने के लिए राजन सुशांत और सुजान सिंह पठानिया के सुपुत्र के साथ-साथ बीजेपी प्रत्याशी बलदेव ठाकुर भी चुनावी मैदान में है।

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फतेहपुर में 1977 से लेकर अब तक सुजान सिंह पठानिया और राजन सुशांत ने बारी बारी से राज किया है। हालांकि, 2009 में कांगड़ा संसदीय सीट से चुनाव जीतने के बाद राजन दिल्ली चले गए। इधर, सुजान सिंह पठानिया ने पूरे 13 साल तक फतेहपुर में एकक्षत्र राज किया। साल 2014 में राजन सुशांत ने बीजेपी से बागवत मोल ले ली। पहले आम आदमी पार्टी से जुड़े और अब अपनी पार्टी खड़ी करने की जुगत में हैं।

फतेहपुर के सियासी इतिहास भी यही कहानी बताती है। 1977 में फतेहपुर विधानसभा क्षेत्र का नाम ज्वाली विधानसभा क्षेत्र हुआ करता था। इंदिरा की इमरजेंसी समाप्त करने की घोषणा के बाद जनता पार्टी के तरफ से सुजान सिंह पठानिया ने चुनाव लड़ा और जीता। इसके बाद 1980 में बनी नई नवेली पार्टी बीजेपी ने 1982 में ज्वाली से युवा उम्मीदवार डॉ राजन सुशांत को कमल थमाया। उन्होंने सुजान सिंह पठानिया को हराकर ज्वाली में कमल खिलाया। फिर 1985 में भी जीत दर्द की। मगर वे 1990 में वे मात खा गए। और सुजान सिंह पठानिया अपने 8 साल के वनवास को समाप्त कर एक बार फिर विधानसभा के सदन के भीतर माननीय बने। इसके बाद से वे लगातार चुनाव जीतते रहे। उन्हें हार का सामना साल 1988 और 2007 में करना पड़ा। यहां फिर राजन सुशांत ने उन्हें मात दी। उसके बाद 2012 और 2017 में एक बार फिर सुजान सिंह पठानिया ने जीत दर्ज की। मगर कोरोना काल में उनकी मृत्यु के बाद सीट खाली हो गई है।

 

कांग्रेस ने उनके वारिस को फतेहपुर की सीट से प्रत्याशी बनाया है। इधर, कल तक सुजान सिंह पठानिया से मुकाबला कर रहे राजन सुशांत को अब उनके बेटे व सियासी वारिस से भिड़ना है। वहीं उनके लिए चुनौती उनकी ही अपनी पुरानी पार्टी बीजेपी प्रत्याशी बलदेव ठाकुर भी है। बता दें कि कांगड़ा जिले की फतेहपुर विधानसभा सीट कांगड़ा चंबा लोकसभा क्षेत्र में आती है। कांग्रेस विधायक सुजान सिंह पठानिया के निधन के चलते कल यहां उपचुनाव होना है। सुजान सिंह पठानिया के बेटे और कांग्रेस प्रत्याशी भवानी पठानिाय, बीजेपी प्रत्याशी बलदेव ठाकुर और राजन सुशांत का राजनीतिक करियर दांव पर लगा हुआ है। फतेहुपर में कुल मतदाता 85 हजार 685 है। जिनमें पुरुष मतदाता कि संख्या 43 हजार 158 है, जबकि महिला मतदाताओं की संख्या 42 हजार 527 है। कल ये मतदाता तीनों कद्दावर प्रत्याशियों के भाग्य का फैसला करेंगे।

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