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कांगड़ा घाटी रेल लाइन से जुड़े गांवों के लोगों के लिए हालात दिन-ब-दिन मुश्किल होते जा रहे हैं। वर्ष 1932 में अंग्रेजी शासनकाल के दौरान जब कांगड़ा घाटी रेल ट्रैक का निर्माण हुआ था, तब रेल लाइन के आर-पार बसे गांवों के लिए 16 रेल फाटक और 24 कैटल क्रॉसिंग की सुविधा दी गई थी, ताकि ग्रामीणों की आवाजाही और पशुधन का आवागमन बाधित न हो।
लेकिन समय के साथ हालात पूरी तरह बदल गए हैं। पहले रेलवे ने सभी 16 फाटकों से कर्मचारियों को हटा दिया, और अब रेलवे प्रशासन 24 कैटल क्रॉसिंग रास्तों को भी एक-एक कर बंद कर रहा है। कई स्थानों पर इन रास्तों को लोहे के मोटे गार्डर लगाकर पूरी तरह सील कर दिया गया है। रास्ते बंद होने से छतरौली सहित आसपास के कई गांवों के लोगों को अब कई किलोमीटर का अतिरिक्त चक्कर लगाना पड़ रहा है।
