-
Advertisement
हिमाचल निकाय चुनाव में जनता ने नकारा वंशवाद, बड़बोलेपन का भी दिया जवाब, कांग्रेस के लिए ‘वेकअप कॉल’
Himachal Election Result: हिमाचल प्रदेश बेशक एक छोटा पहाड़ी राज्य है, लेकिन यहां के मतदाताओं ने अपनी गहरी राजनीतिक समझ से बड़े-बड़े सियासी दिग्गजों को चौंका दिया है। हाल ही में संपन्न हुए पंचायत समिति, जिला परिषद और नगर निगम चुनावों के परिणाम स्पष्ट करते हैं कि अब केवल पार्टी का नाम या पारिवारिक पृष्ठभूमि जीत की गारंटी नहीं है। मंडी और सोलन में जनता ने वंशवाद और नेताओं के बड़बोलेपन पर करारा प्रहार किया है।
मंडी: दिग्गजों के वारिसों को जनता ने चटाई धूल
मंडी जिले में मतदाताओं ने परिवारवाद के खिलाफ कड़ा संदेश दिया है। नौ बार के विधायक और पूर्व कैबिनेट मंत्री कौल सिंह की बेटी चंपा ठाकुर (जो जिला कांग्रेस कमेटी की मुखिया भी हैं) को जिला परिषद चुनाव में करारी हार मिली। नगर निगम चुनाव में कौल सिंह के भतीजे भी हार गए। पूर्व कांग्रेस विधायक मस्त राम की पत्नी को भी शिकस्त का सामना करना पड़ा।
बीजेपी के वारिस भी नकारे गए: जनता ने भाजपा के दिग्गज पूर्व कैबिनेट मंत्री महेंद्र ठाकुर के परिवारवाद को भी आईना दिखाया। उनकी बेटी वंदना गुलेरिया जिला परिषद का चुनाव हार गई हैं। इससे पहले उनके बेटे रजत ठाकुर भी विधानसभा चुनाव हार चुके हैं।
सोलन: बड़बोलेपन को जनता का जवाब
मतदाताओं ने केवल वंशवाद ही नहीं, बल्कि नेताओं के अहंकार को भी खारिज किया है। सोलन नगर निगम में बीजेपी की जीत को स्थानीय कैबिनेट मंत्री धनीराम शांडिल के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है। हाल ही में पथरी के ऑपरेशन के दौरान एक महिला की मौत पर शांडिल ने विवादास्पद बयान दिया था। जनता ने इस असंवेदनशील बयान का जवाब अपने वोट से दिया है।
सत्ताधारी कांग्रेस के लिए खतरे की घंटी
सीएम सुखविंदर सिंह सुक्खू और डिप्टी सीएम के गृह जिलों में भी कांग्रेस को कई जगह हार का सामना करना पड़ा है। चार नगर निगमों में से तीन में कांग्रेस हारी है। सीएम सुक्खू ने मंडी की हार का बचाव करते हुए कहा कि वहां बीजेपी की जीत जयराम ठाकुर की नहीं, बल्कि अनिल शर्मा की है और पंचायतों में कांग्रेस को जीत मिली है। वहीं, उत्साहित नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर ने दावा किया है कि अगले चुनाव में कांग्रेस का सूपड़ा साफ हो जाएगा।
संजू चौधरी
हिमाचल अभी अभी की सभी खबरों के पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें

