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हिमाचल की किस्मत बदलने वाला है यह प्रोजेक्ट, PM मोदी की मौजूदगी में होगा ऐतिहासिक MoU
Kishau Hydroelectric Project: हिमाचल प्रदेश के लिए एक बड़ी और ऐतिहासिक सफलता सामने आई है। 422 मेगावाट क्षमता वाली किशाऊ बहुउद्देश्यीय जलविद्युत परियोजना को लेकर केंद्र सरकार, साझेदार राज्यों और भारत सरकार के बीच जल्द ही पीएम नरेंद्र मोदी की गरिमामयी उपस्थिति में एक समझौता ज्ञापन (MoU) हस्ताक्षरित होने की संभावना है। इस औपचारिक समझौते से पहले केंद्र सरकार ने एमओयू का अंतिम प्रारूप (Draft) साझेदार राज्यों को उनकी समीक्षा, सुझावों और टिप्पणियों के लिए भेज दिया है।
इसी संदर्भ में सीएम सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने शिमला में एक उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक की अध्यक्षता की और संबंधित अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश जारी किए। उन्होंने स्पष्ट किया कि राज्य सरकार हिमाचल प्रदेश के लोगों के अधिकारों और हितों की पूरी सुरक्षा सुनिश्चित करते हुए ही इस परियोजना के क्रियान्वयन के लिए आगे बढ़ रही है।
800 करोड़ का वित्तीय बोझ टला, हर साल होगी ₹600 करोड़ की कमाई
सीएम सुक्खू ने बताया कि वर्तमान राज्य सरकार के कड़े प्रयासों के चलते पिछले आठ वर्षों से चला आ रहा गतिरोध पूरी तरह समाप्त हो गया है।
शून्य निवेश (Zero Investment): संशोधित व्यवस्था के तहत अब हिमाचल प्रदेश को इस बड़ी परियोजना में अपनी ओर से कोई भी पूंजीगत या वित्तीय निवेश नहीं करना होगा।
बंपर राजस्व: बिना किसी निवेश के ही राज्य को इस परियोजना से प्रतिवर्ष लगभग ₹600 करोड़ का राजस्व प्राप्त होने का अनुमान है।
पिछली सरकार के फैसले में बदलाव: पूर्व भाजपा सरकार ने इस परियोजना में राज्य की हिस्सेदारी के रूप में लगभग ₹800 करोड़ का योगदान देने पर सहमति व्यक्त की थी। वर्तमान सरकार ने राज्य की वित्तीय स्थिति को देखते हुए इसका कड़ा विरोध किया और इस भारी वित्तीय बोझ को सफलतापूर्वक टाल दिया।
पानी और बिजली पर हिमाचल का हक सुरक्षित
सीएम ने कहा कि वर्तमान सरकार ने पूर्व के समझौते के प्रारूप को पूरी तरह अस्वीकृत कर दिया था। सरकार ने प्रदेश के दीर्घकालिक हितों को सुरक्षित रखते हुए नई प्रस्तावित शर्तों पर सभी हितधारकों से स्वीकृति प्राप्त की है।
वैध हिस्सा: नई व्यवस्था के तहत सभी साझेदार राज्यों को बिजली और पानी में उनका वैध हिस्सा मिलेगा।
जलाशय से पानी: हिमाचल प्रदेश को अपनी आवश्यकता के अनुसार परियोजना के जलाशय से पर्याप्त पानी उपलब्ध करवाया जाएगा।
यमुना बेसिन पर अधिकार: हिमाचल प्रदेश ने यमुना बेसिन में 378 मिलियन घन मीटर जल पर अपना वैध अधिकार पूरी तरह सुरक्षित कर लिया है।
BBMB से लंबित बकाया वसूलने के प्रयास भी तेज
सीएम ने बैठक में एक और बड़े मामले का जिक्र करते हुए कहा कि राज्य सरकार भाखड़ा ब्यास प्रबंधन बोर्ड (BBMB) की परियोजनाओं से हिमाचल प्रदेश को मिलने वाले 13,066 मिलियन यूनिट बिजली के लंबित बकाये को प्राप्त करने के लिए भी अपने प्रयास तेज कर रही है। सर्वोच्च न्यायालय के स्पष्ट आदेशों के बावजूद यह मामला पिछले लगभग 15 वर्षों से लटका हुआ है, जिसे सरकार जल्द सुलझाने की कोशिश में है।
संजू चौधरी

