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शिमला में तहबाजारियों का फूटा गुस्सा: आजीविका भवन में शिफ्टिंग का विरोध, दी उग्र आंदोलन की चेतावनी
Street Vendors Protest Shimla: राजधानी शिमला में अतिक्रमण हटाने को लेकर नगर निगम प्रशासन और तहबाजारियों (स्ट्रीट वेंडर्स) के बीच टकराव गहराता जा रहा है। नगर निगम की कार्रवाई से लोअर बाजार की सड़कें भले ही चौड़ी हो गई हों, लेकिन तहबाजारियों के सामने रोजी-रोटी का गंभीर संकट खड़ा हो गया है। पिछले करीब एक सप्ताह से काम पूरी तरह ठप होने के कारण सोमवार को तहबाजारियों का सब्र जवाब दे गया। गुस्साए वेंडर्स ने डीसी कार्यालय के बाहर जोरदार प्रदर्शन करते हुए नगर निगम प्रशासन के खिलाफ आर-पार की लड़ाई का ऐलान कर दिया है।
जबरन सामान उठाने का आरोप
तहबाजारियों ने नगर निगम के कर्मचारियों पर जबरन सामान उठाने और प्रताड़ित करने के गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि इस कार्रवाई से उनका जीना मुहाल हो गया है और उनके परिवारों के सामने भूखे मरने की नौबत आ गई है।
‘आजीविका भवन’ में जाने से साफ इनकार
प्रशासन ने तहबाजारियों को वैकल्पिक व्यवस्था के तौर पर ‘आजीविका भवन’ में शिफ्ट होने का प्रस्ताव दिया था, जिसे वेंडर्स ने सिरे से खारिज कर दिया है। तहबाजारियों के प्रतिनिधियों ने इसे पूरी तरह से ‘असफल मार्केट’ करार देते हुए कहा कि वहां ग्राहकों की आवाजाही न के बराबर है। उन्होंने तिब्बती मार्केट का उदाहरण देते हुए कहा कि वहां सालों से बैठे दुकानदारों का कारोबार भी बंदी की कगार पर है, ऐसे में नई जगह पर वे अपना परिवार कैसे पालेंगे।
रोजगार सुरक्षित रखने की मांग
प्रदर्शनकारियों ने स्पष्ट किया कि उन्हें सड़कों पर बैठने का कोई शौक नहीं है और वे शिफ्ट होने के लिए पूरी तरह तैयार हैं, लेकिन उन्हें ऐसी जगह दी जाए जहां उनका रोजगार सुरक्षित रह सके। वेंडर्स ने निम्नलिखित प्रमुख मांगें प्रशासन के सामने रखी हैं:
सब्जी मंडी में 500 करोड़ रुपये की लागत से बनने वाले मॉल या पुरानी तिब्बती मार्केट में उनके लिए उचित स्पेस बनाया जाए।
बाहरी राज्यों (पंजाब, चंडीगढ़ आदि) से आकर संडे मार्केट में डेरा डालने वालों पर सख्त कार्रवाई हो।
स्थानीय और जेन्युइन कार्ड धारक वेंडर्स को बेवजह परेशान न किया जाए।
तहबाजारियों ने कोर्ट के आदेशों का हवाला देते हुए कहा कि अदालत ने उन्हें हटाने का नहीं, बल्कि उनके लिए उचित जगह चिह्नित करने का आदेश दिया था।
‘दवा तक के पैसे नहीं, नेताओं ने दिए खोखले आश्वासन’
अपनी आपबीती सुनाते हुए तहबाजारियों ने बताया कि हफ्तों से काम बंद होने के कारण बुजुर्ग दुकानदारों के पास दवाइयों तक के पैसे नहीं बचे हैं और घरों में चूल्हे जलना बंद हो गए हैं। उन्होंने रोष जताते हुए कहा कि सीएम, मंत्रियों और स्थानीय विधायकों से उन्हें अब तक सिर्फ खोखले आश्वासन ही मिले हैं। जमीनी स्तर पर कोई राहत नहीं दी गई। वेंडर्स ने प्रशासन को दो टूक चेतावनी दी है कि यदि प्रशासन ने उनकी सुध नहीं ली और उन्हें जबरन उजाड़ने की कोशिश जारी रखी, तो वे उग्र आंदोलन के लिए मजबूर होंगे।
संजू चौधरी

