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कोरोना का कहर और मंदी की मार, यहां मजबूरी में छात्राएं उतर रही जिस्मफरोशी में

ब्रिटेन में भी बहुत गहरा रहा है मंदी और कोरोना का असर

कोरोना का कहर और मंदी की मार, यहां मजबूरी में छात्राएं उतर रही जिस्मफरोशी में

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कोरोना के कारण दुनिया बड़ी आर्थिक मंदी देख रही है। बहुत सी जगहों में काम धंधे ठप हैं और लोगों को रोजगार भी नहीं मिल रहा है। जो बने बनाए धंधे थे वो भी कोरोना में चौपट हो गए हैं। भारत में कोरोना के कारण बहुत से रोजगार लोग खो चुके हैं। इसी तरह ब्रिटेन में आर्थिक मंदी (Economic Downturn in Britain) किस हद तक असर कर चुकी है इसका अंदाजा आप इसी बात से लगा सकते हैं कि यहां छात्राएं मजबूरी में जिस्मफरोशी (Prostitution) के धंधे में उतर रही हैं।

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ब्रिटेन को लेकर यह खुलासा एक संस्था ने किया है। दरअसल यह संस्था प्रॉस्टिट्यूट (Prostitutes) के लिए काम करती है। इस संस्था का नाम है इंग्लिश कलेक्टिव ऑफ प्रॉस्टिट्यूट (English Collective of Prostitutes)। संस्था का कहना है कि उसे लगातार यूनिवर्सिटी और कॉलेज (University and College) से सेक्स वर्क को लेकर फोन आ रहे हैं। संस्था के मुताबिक इस साल आने वाली कॉल तीन गुना की बढ़ोतरी हुई है। यही नहीं, कॉल करने वाली लड़कियों में ज्यादातर स्टूडेंट्स (Students) हैं जो आर्थिक तंगी के कारण जिस्मफरोशी (Prostitution) के धंधे में उतरने को मजबूर हो चुकी हैं।

 

 

इंग्लिश कलेक्टिव ऑफ प्रॉस्टिट्यूट संस्था की प्रवक्ता लॉरा वॉटसन (Laura Watson) ने इस बाबत मिरर नाम की वेबसाइट के साथ कई चौंकाने वाले खुलासे किए हैं। लॉरा वॉटसन कहती हैं कि कोरोना (Corona) ने बहुत सारे तरीकों से लोगों को प्रभावित किया है। कॉलेज और यूनिवर्सिटी में ट्यूशन फीस में भी बढ़ोतरी हुई है। इसके चलते छात्राओं के सामने दिक्कत खड़ी हो गई है। लॉरा वॉटसन के मुताबिक कुछ ऐसी छात्राएं थीं जो पढ़ाई के साथ पार्ट टाइम जॉब (Part Time Jobs) आदि कर अपना खर्चा चलाती थीं। उनमें से कई की नौकरी अब जा चुकी है। इस वजह से इन छात्राओं के पास प्रॉस्टिट्यूशन (Prostitution) के सहारे पैसा कमाने के अलावा कोई और रास्ता नहीं बच रहा।

क्या काम करती है संस्था

संस्था की प्रवक्ता (Spokesperson) का कहना है कि कोरोना के कारण बहुत सारी ट्रेडिशनल जॉब (Job) खत्म हो चुकी हैं। ज्यादातर छात्राएं पढ़ाई के साथ-साथ शॉपिंग मॉल, पब, बार और रेस्टोरेंट पर काम करती थीं। अब चूंकि नौकरी में ऑप्शन की कमी है और पार्ट टाइम जॉब (Part Time Jobs) भी नहीं मिल रहीं तो कई स्टूडेंट्स सेक्स वर्क में शामिल होने के लिए मजबूर हैं। दरअसल, इंग्लिश कलेक्टिव ऑफ प्रॉस्टिट्यूट संस्था (English Collective of Prostitutes) की शुरुआत 1975 में हुई थी। इस संस्था का उद्देश्य सेक्स वर्कर्स (Sex Workers) को उनके अधिकारों के लिए जागरूक करना और सेक्स वर्कर्स की सुरक्षा को सुनिश्चित करना है।

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