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Inside: शुक्ला ने बदली परंपरा,सीधे भाषण कोई लाग-लपेट नहीं-क्यों सहज नहीं दिख रहे Rathore जाने डिटेल
शिमला। हिमाचल कांग्रेस प्रभारी (Himachal Congress in-charge) राजीव शुक्ला ने प्रभारी बनने के बाद पहली मर्तबा प्रदेश का रूख किया। प्रदेश के कांग्रेसी उन्हें अपने-अपने तरीके से लुभाने की कोशिश करते रहे, लेकिन राजनीति के मंझे हुए खिलाड़ी के तौर पर शुक्ला ने पहले ही दौरे में कई बातों को स्पष्ट कर दिया है। पार्टी नेताओं की मीटिंग के दौरान शुक्ला ने पहली परंपरा तो ये बदल डाली की भाषण से पहले कोई संबोधन नहीं, सीधे अपनी बात रखना शुरू करें। यानी शुक्ला का कहना है कि इससे समय की बर्बादी होती है,लिहाजा जो भी नेता अपनी बात-सुझाव रखना चाहता है वह सीधे-सीधे शुरू हो जाए। इस तरह की रीत उन्होंने अपने पहले दौरे से शुरू करवा दी है। वहीं,शुक्ला ने ये बात भी स्पष्ट कर दी है कि अभी हम लोग खंडहर में खड़े हैं, पहले महल बनने दो फिर कमरों की बात आएगी। उनके कहने का मतलब था कि अभी तो हमें महल बनाने यानी सरकार बनाने की जुगत लगानी है,उसके बाद मुख्यमंत्री-मंत्री बनने की बारी आएगी।
राठौर के माथे पर चिंता की लकीरे
राजीव शुक्ला (Rajeev Shukla)पहली मर्तबा प्रभारी बनकर हिमाचल आए लेकिन पार्टी के प्रदेशाध्यक्ष कुलदीप राठौर (Kuldeep Rathore) खुश नजर नहीं आए। उनके माथे पर चिंता की लकीरें साफ झलकती हुई नजर आती रहीं। शुक्ला गुरूवार को जैसे ही पीटरहॉफ पहुंचे तो उन्होंने राजीव भवन निकलने से पहले प्रोग्राम पूछ लिया,उन्हें बताया गया कि 24 नेता संबोधन करेंगे। इस पर शुक्ला ने साफ कर दिया कि मुझे मिलाकर मात्र तीन नेता संबोधन करेंगे। हालांकि,पूर्व कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष सुखविंदर सिंह सुक्खू (Sukhwinder Singh Sukhu) के बीच में फंसने पर पूर्व पार्टी प्रदेशाध्यक्षों का भी संबोधन बाद में करवाना पड़ा। यानी शुक्ला के साथ-साथ राठौर व नेता प्रतिपक्ष मुकेश अग्निहोत्री (Leader of Opposition Mukesh Agnihotri) के अलावा तीन पूर्व प्रदेशाध्यक्ष भी बोले। बाकी नेताओं से मात्र सुझाव ही लिए गए। पर इस सबके बीच गुरुवार से लेकर शुक्रवार तक राठौर कहीं ना कहीं ढीले दिखे।
डिनर के बाद मुकेश का पैदल मार्च
पार्टी प्रभारी राजीव शुक्ला के पहली मर्तबा हिमाचल आने पर उनके सम्मान में वीरवार रात पीटरहॉफ (Peterhalf) में डिनर रखा गया था। इस दौरान मीटिंग में मौजूद नेताओं को न्योता था। डिनर के बाद बारी-बारी कर नेता जाते रहे। उसके बाद नेता प्रतिपक्ष मुकेश अग्निहोत्री कुछ एक विधायकों संग पैदल ही विधायक सदन की तरफ निकले। जबकि,उस दौरान पार्टी प्रदेशाध्यक्ष कुलदीप राठौर अपने चार पदाधिकारी समर्थकों के साथ पीटरहॉफ के लॉन में खड़े दिखे। यानी,यहां ये कहना गलत नहीं होगा कि कहीं ना कहीं, मुकेश अपना कुनबा बनाने की जुगत में हैं। उन्होंने कुछ विधायकों को अपने साथ जोड़ा भी है। उन्हीं के साथ वह पैदल मार्च करते हुए निकले। उनमें विनय कुमार व आशीष बुटेल भी शामिल थे।
मुकेश की बात राठौर को खटकी
नेता प्रतिपक्ष मुकेश अग्निहोत्री ने अपने संबोधन में जब ये कहना शुरू किया कि विधायक दल का काम विधानसभा के भीतर माहौल बनाना होता है। उसके बाद संगठन का काम होता है कि उसे आगे जनता के बीच मुद्दा बनाकर ले जाए। ये बात राठौर को कुछ खटकी तो वह बीच में ही बोल पड़े कि क्या आपको ये लगता है कि संगठन काम नहीं कर रहा। इस पर मुकेश ने स्पष्ट किया कि,ऐसा नहीं है,हम भी संगठन का हिस्सा हैं,लेकिन संगठन को मुद्दों को जनता के बीच भुनाना पड़ाता है। यहां भी राठौर कुछ असहज नजर आते दिखे। लग रहा था कि रिश्तों में कहीं ना कहीं दरार चल रही है।
हर्षवर्धन का ये है गम
शिलाई से पार्टी विधायक हर्षवर्धन चौहान (Harshvardhan Chauhan) के दिल की बात जुबां पर आ गई। पार्टी प्रभारी के सामने उन्होंने बताया कि उनके पिता सात मर्तबा शिलाई विधानसभा क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करते रहे,उसके बाद पांचवी मर्तबा वह इसी विधानसभा क्षेत्र का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं। लेकिन उनकी पीड़ा ये है कि कभी मंत्री बनने का मौका नहीं मिल पाया।इसलिए अब विधायक बनने का भी दिल नहीं करता। यानी वह इस बात का संदेश देना चाह रहे थे कि उनसे जूनियर मंत्री बन गए पर उन्हें मौका नहीं मिला।
