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Corona पीड़ित युवक के अंतिम संस्कार मामले में High Court का प्रदेश सरकार को Notice जारी

Corona पीड़ित युवक के अंतिम संस्कार मामले में High Court का प्रदेश सरकार को Notice जारी

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शिमला। हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट  (Himachal High Court) ने कोरोना पीड़ित युवक (Corona victim’s youth) के शव के शिमला में हुए अंतिम संस्कार मामले में प्रदेश सरकार को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है। मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति लिंगप्पा रामास्वामी और न्यायमूर्ति ज्योत्सना रेवाल दुआ ने यह आदेश जारी किए। अधिवक्ता अनिल कुमार ने याचिका दायर कर मांग की थी कि इस मामले में आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई की जाए और पीड़ित परिवार को मुआवजा भी दिया जाए। याचिकाकर्ता का कहना है कि मृतक के शव (Dead Body) को उसके परिवार वालों को देखने भी नहीं दिया गया और लावारिस घोषित करके उसे रात के अंधेरे में श्मशान घाट ले जाकर जला दिया गया। याचिका में प्रदेश के मुख्य सचिव, अतिरिक्त मुख्य सचिव (स्वास्थ्य) और विशेष स्वास्थ्य सचिव के अलावा शिमला नगर निगम को भी पार्टी बनाया गया है।

याचिका में कहा,मृतक के माता-पिता की भावनाओं को ठेस पहुंची

याचिकाकर्ता ने कहा कि प्रशासन  द्वारा अंतिम संस्कार संपन्न कराए जाने के तरीके से मृतक के माता.पिताए सरकाघाट क्षेत्र के लोगों एवं स्वयं उसकी धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंची है।  इसके अलावा युवक के माता पिता को असंवैधानिक ढंग से उसके अंतिम संस्कार के अधिकार से भी वंचित किया गया। अनिल कुमार ने याचिका में कहा है कि केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय ने कोविड -19 से हुई मृत्यु के बाद शवों के अंतिम संस्कार (Funeral) को लेकर 15 मार्च को विस्तृत गाइडलाइंस जारी की थीं।  लेकिन इंदिरा गांधी मेडिकल कॉलेज अस्पताल (IGMC)में सरकाघाट के युवक की मृत्यु के पश्चात इन गाइडलाइंस को लागू नहीं किया गया।

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उन्होंने कोर्ट को बताया कि इन गाइडलाइंस में स्पष्ट कहा गया है कि  शव को किस तरह बैग में पैक किया जाएगा और मृतक के संबंधियों को उसका एक छोर खोलकर चेहरा दिखाया जा सकता है। लेकिन इस मामले में ऐसा नहीं किया गया। बल्कि शव को लावारिस घोषित कर रात को डीजल डालकर जलाया गया। जबकि हिंदू धार्मिक मान्यताओं के अनुसार सूर्यास्त के बाद अंतिम संस्कार नहीं हो सकता।


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याचिका में आरोप,कर्मचारी चिता जलते ही वापस चले गए

याचिकाकर्ता ने कहा कि केंद्र सरकार की गाइडलाइंस में शव के अंतिम संस्कार में धार्मिक रीति.रिवाजों का पालन करने की छूट दी गई है। याचिका में आरोप लगाया गया है कि स्वास्थ्य कर्मचारी शव को श्मशान घाट में लाने के बाद चिता जलते ही वापस चले गए थे।  जबकि गाइडलाइंस में कहा गया है कि शव को लाने वाले स्वास्थ्य कर्मचारियों को अंतिम संस्कार संपन्न होने तक वहीं रुकना चाहिए। कोर्ट से याचिका में यह आदेश देने की गुहार लगाई गई है कि भविष्य में इस प्रकार कोविड.19 से हुई मौतों के मामले में मृतक और उसके परिवार की धार्मिक भावनाओं का सम्मान किया जाए।

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