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मौसम के पूर्वानुमान की अत्याधुनिक प्रणाली की जरूरत है: सीएम सुक्खू
शिमला। सीएम ठाकुर सुखविंदर सिंह सुक्खू ने हिमाचल प्रदेश में मौसम के पूर्वानुमान (Weather Forecasting in Himachal) की अत्याधुनिक तकनीक की जरूरत बताई है। सीएम सुक्खू शनिवार को यहां राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण की 8वीं बैठक को संबोधित कर रहे थे।
सीएम ने कहा कि प्रदेश के हिमाच्छादित क्षेत्रों में पांच स्वचालित मौसम पुर्वानुमान प्रणालियां स्थापित करना प्रस्तावित है। जलवायु परिवर्तन (Climate Change) हमारे समक्ष सबसे बड़ी चुनौती है और इस समस्या से पार पाने के लिए समुचित कदम उठाना बेहद आवश्यक है। उन्होंने कहा कि ग्लेशियरों के पिघलने से बनने वाली अस्थायी झीलों की निरंतर निगरानी होनी चाहिए। बरसात में बांधों से पानी रूक-रूककर पानी छोड़ा जाना चाहिए, ताकि निचले क्षेत्रों में होने वाले नुकसान को सीमित किया जा सके। सीएम सुक्खू ने कहा कि आपदा संबंधी हेल्पलाइन नंबर 1077 और 1070 के अतिरिक्त एक अन्य हेल्पलाइन नंबर 1100 को भी इसमें जोड़ा जाना चाहिए, ताकि आपदा के समय प्रभावितों को समय पर समुचित सहायता उपलब्ध करवाई जा सके।
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बादल फटने की घटनाओं का हो अध्ययन
सीएम ने कहा कि प्रदेश में राजीव गांधी राजकीय डे-बोर्डिंग स्कूल योजना के तहत भवनों के निर्माण में भूकंपरोधी तकनीक (Earthquake Proof Technology) का उपयोग सुनिश्चित किया जाएगा। उन्होंने बादल फटने की घटनाओं की पूर्व सूचना से संबंधित प्रणाली विकसित करने पर भी बल दिया, ताकि इससे होने वाले नुकसान को न्यूनतम किया जा सके। उन्होंने प्रदेश में बादल फटने की बढ़ती घटनाओं पर अध्ययन करने के भी निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि पहाड़ी ढलानों के कटान, मलबा प्रबन्धन और निर्माण से निकलने वाले मलबे के लिए निर्धारित बिन्दुओं की पहचान सुनिश्चित की जानी चाहिए और जल निकासी व्यवस्था पर भी विशेष ध्यान केन्द्रित किया जाना चाहिए।

