-
Advertisement
Winter Session: कांग्रेस-बीजेपी की सरकारें आई पर परंपरा ही निभाई, Tapovan वहीं का वहीं खड़ा दिखा
Himachal Vidhan Sabha Winter Session: वक्त था जब हिमाचल विधानसभा का शीतकालीन सत्र (Himachal Vidhan Sabha Winter Session) आता था,सरकार-विपक्ष की दमक दिखती थी। वक्त था,सरकार के साथ-साथ विपक्ष वालों को भी हर रात न्यौतों की झडी रहती थी। वक्त था,धर्मशाला (Dharamshala) की चहलकदमी कुछ अलग दिखती थी,अब अंदाज जुदा है। उस वक्त शिमला से धर्मशाला की दूरी कम होती देखी जाती थी, अब ऐसा नहीं। उस वक्त ऊपरी और निचले हिमाचल का मसला रहता था, अब वह भी नहीं। हरी टोपी (Topi) बनाम मैरून टोपी का जलवा रहता था, अब वह भी नहीं। वक्त के साथ चीजें बदल गई,सरकार-विपक्ष दोनों की चाल-ढाल बदल गई।
सरकार-विपक्ष जितने दिन भी तपोवन में आती है,मुद्दों से ज्यादा सियासत कर चलती बनती है। तपोवन का रास्ता तो स्व वीरभद्र सिंह दिखा गए थे लेकिन उससे आगे चलने की हिम्मत किसी ने नहीं दिखाई@SukhuSukhvinder @KSRathoreINC @priyankagandhi @DhumalHP @shantakumarbjp @DcKangra @SpKangra pic.twitter.com/9ns8SqHyEP
— Himachal Abhi Abhi (@himachal_abhi) November 25, 2025
साल भर में खुलते हैं एक बार दरवाजे
खैर सरकार का स्पर्श ही धर्मशाला के लिए बहुत है,लेकिन अब साल बहुत हो चले सरकारें आते रही हैं,लेकिन तपोवन वहीं का वहीं खड़ा दिखता है। साल भर में एक बार दरवाजे खुलते हैं,फिर अगले साल का इंतजार रहता है। वर्षों से आवाज उठती आई है,यहां कुछ ऐसा किया जाएगा कि सालभर चहल-कदमी नजर आएगी पर हुआ कभी कुछ नहीं। सरकार-विपक्ष जितने दिन भी तपोवन में आती है,मुद्दों से ज्यादा सियासत कर चलती बनती है। तपोवन (Tapovan) का रास्ता तो स्व वीरभद्र सिंह (Late Virbhadra Singh) दिखा गए थे लेकिन उससे आगे चलने की हिम्मत किसी ने नहीं दिखाई। बस एक परंपरा (Tradition) है जिसे निभाने सरकारें यहां आती रही हैं,इससे ज्यादा कुछ नहीं है।
तपोवन का उपयोग जिस तरह से होना चाहिए,वह हो ही नहीं पाया
मसला साल दर साल होते चला गया,अब फिर से सरकार आएगी चली जाएगी,विपक्ष (Opposition) भी जमकर शोर-शराबा करेगा,असल मुद्दे दबकर रह जाएंगे। बात यहां ये नहीं है इस तपोवन का उपयोग जिस तरह से होना चाहिए था,वह हो ही नहीं पाया है। वरना ये सुंदर इमारत सालभर में एक बार नहीं बल्कि हर दिन अपनी चौखट पर रौनक देखती जो नहीं है। हुक्मरान इस पर क्या करते हैं,इस बार भी इस बात का इंतजार है।
पहला शीतकालीन सत्र धर्मशाला के प्रयास भवन में हुआ था
धर्मशाला में शीतकालीन सत्र की परंपरा तत्कालीन सीएम वीरभद्र सिंह (Than CM Virbhadra Singh) ने वर्ष 2005 में रखी थी। पहला शीतकालीन सत्र धर्मशाला स्थित राजकीय महाविद्यालय के प्रयास भवन (Prayas Bhawan of Government College Dharamshala) में हुआ था। उसी दौरान वीरभद्र सिंह ने धर्मशाला के तपोवन में प्रदेश के दूसरे विधानसभा भवन की नींव रखी,व इसे रिकार्ड समय यानी एक वर्ष में पूरा कर इसका ना केवल उद्घाटन किया बल्कि यहीं नए भवन में 2006 का पहली बार शीतकालीन सत्र भी करवाया।
-मनोज ठाकुर
