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करतार सोंखले ने शौकिया तौर पर शुरू किया था काम, उसी ने दिलाया पद्मश्री सम्मान, देखें Video

अवार्ड के लिए चुने जाने की खबर से बंबू आर्ट बनाने वाले करतार के घर में खुशी का माहौल

करतार सोंखले ने शौकिया तौर पर शुरू किया था काम, उसी ने दिलाया पद्मश्री सम्मान, देखें Video

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हमीरपुर। बंबू आर्ट (Bamboo art) बनाने वाले हमीरपुर के करतार सोखंले पद्मश्री अवार्ड (Padma Shri award) के लिए चुने गए इस खबर से उनके घर में खुशी का माहौल है। सोमवार देर शाम को केन्द्र सरकार ने उनके नाम का घोषणा की। करतार सोंखले (Kartar Sokhale) ने कहा कि काफी समय से उनको इसका इंतजार था जो अब जाकर पूरा हुआ है। करतार हमीरपुर जिला के नौहंगी गांव का रहने वाले हैं और मार्च माह में एनआईटी हमीरपुर के स्वास्थ्य विभाग से वरिष्ठ फार्मासिस्ट के पद से सेवानिवृत हुए हैं। करतार को बचपन से ही कुछ अलग करने का शौक रहा है और वर्ष 2000 में मन में उठे एक शौक के चलते शीशे की बोतल में बांस से एक डिजाइन तैयार कर दिया और उसके बाद सिलसिला जारी है। उन्होंने अब तक सैकड़ों बोतलों में विभिन्न कलाकृतियां बनाकर तैयार की हैं जिनको देखकर लोग काफी प्रशंसा करते हैं। हालांकि करतार सिंह इन कलाकृतियां की प्रदर्शनी (Exhibition) प्रदेश सहित देश के विभिन्न हिस्सों में भी लगा चुके हैं जहां पर हर किसी ने इसकी सराहना की है।


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करतार सोंखले ने शीशे की बोतल में ऐसी कलाकृतियां बनाई हैं जिन्हें देखकर हर कोई दंग रह जाता है। चाहे अस्तित्व खो रही धरोहरे हों या फिर मंदिर या मशहूर टावर इन सभी को करतार सिंह सोंखला ने अपनी कला से बोतल के अंदर कैद कर दिया है। अभी हाल ही में लॉकडाउन के दौरान करतार सिंह सोंखला ने पीएम मोदी , सीएम जयराम ठाकुर, पूर्व राष्ट्रपति अबदुल कलाम के अलावा साई राम, शिव परिवार की मूर्तियां बोतल में बना डाली है जिन्हें देखकर हर कोई हैरान रह जाता है।

 

करतार सोंखले ने बताया कि उन्हें दूरभाष पर जैसी ही पद्मश्री मिलने की सूचना मिली तो वह काफी खुश हुए। उन्होंने कहा कि काफी समय से उनको इसका इंतजार था जो अब जाकर पूरा हुआ है जिससे वह बहुत ज्यादा खुश है। उन्होंने कहा कि बंबू आर्ट युवाओं के लिए स्वरोजगार (Self employment) के रूप में विकसित किया जा सकता है और सरकार को इस ओर ध्यान देना चाहिए। हिमाचल में टूरिस्ट आते हैं तो सरकार अगर बंबू निर्मित कलाकृतियों को बाजार उपलब्ध करवाती है तो इसे व्यवसाय के रूप में भी अपनाया जा सकता है।

करतार सोंखले की पत्नी सुनीता ने बताया कि उनके पति काफी समय से उम्मीद लगाए हुए थे, लेकिन जैसे ही इसी सूचना मिली सारा परिवार खुश है और लगता है आज उनके पति के काम को सच्ची सराहना मिली है। उन्होंने कहा कि इन कलाकृतियों को बनाने में खर्च बिल्कुल नहीं किया और लोगों द्वारा बेकार समझे जाने वाले बंबू व शीशे की बोतलों का प्रयोग किया। उन्होंने कहा कि पहले तो इस तरह का काम बेकार लगता था, लेकिन जब लोगों ने भी बहुत सराहना की तो उन्होंने काम जारी रखा। करतार सिंह के बेटे केतन सोंखले ने बताया कि लॉकडाउन के दौरान उन्हें नई कलाकृतियों को बनाने के साथ ही विभिन्न अवार्ड के लिए अपने नाम भेजे जिससे उन्हें काफी ज्यादा सराहना भी मिली। उन्होने बताया कि इससे पहले भी उन्होंने पद्मश्री के लिए अपनी कलाकृतियों को नामित किया था मगर आज उन्हें इसी सूचना मिली जिससे सभी काफी खुश हैं।

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