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ताजमहल ही नहीं दुनिया में और भी इमारतें हैं प्यार की निशानी, जानिए इनके बारे में

ताजमहल ही नहीं दुनिया में और भी इमारतें हैं प्यार की निशानी, जानिए इनके बारे में

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हर कोई चाहता है कि उनका प्यार हमेशा के लिए यादगार बन जाए और दुनिया उसे किसी ना किसी रूप मं याद रखे। आगरा का ताजमहल (Taj Mahal) मुगल बादशाह शाहजहां ने अपनी पत्नी मुमताज के प्यार का प्रतीक है। इस खूबसूरत प्यार की निशानी (Symbol of love) को देखने हजारों लोग आते हैं और दोनों प्यार करने वालों को याद करते हैं। शाहजहां की तरह और भी कई राजा या अमीर लोग रहे जिन्होंने अपनी पत्नियों के लिए खूबसूरत इमारतें और आलीशान महल बनवाएं। आज हम आपको ऐसी ही प्यार की कुछ निशानियों के बारे में बताने जा रहे हैं …

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हुमायूं का मकबरा

दिल्ली में बना यह मकबरा ताजमहल से कम नहीं है। इसे मुगल शासक हुमायूं की याद में उनकी पत्नी बेगम बानो ने 1565 में इस आलीशान मकबरे का निर्माण करवाया। इसी स्मारक से ही दुनिया को शिल्पकला और वास्तुकला के बारे में पता चला। इस मकबरे के निर्माण में करीब 15 लाख रुपए लगे। ये आज दिल्ली का मुख्य पर्यटक स्थल है।

हैंगिंग गार्डेंस बेबीलोन

मध्य इराक में बगदाद के 90 किमी दक्षिण में फरात नदी के तट पर स्थित बेबीलोन में बना हैंगिंग गार्डेंस 2500 साल पुराना है। बेबीलोन के बादशाह ने इसे साल 605 में अपनी पत्नी एमिटिस को खुश करने के लिए बनवाया था। शादी से पहले एमिटिस हरे भरे मैदान, ऊंचे पहाड़ और प्राकृतिक के सौंद्रय में रहती थी और शादी के बाद वह काफी उदास रहने लगी थी। बादशाह ने अपनी रानी की उदासी का कारण जानकर अपने महल के आसपास उसी तरह के हरे-भरे जंगल, हरियाली, पहाड़ और बागबगीचे आदि बना दिए जिसे हैंगिंग गार्डेंस का नाम दिया गया।

बोल्ट कैसल

कनाडा में बने इस महल को जौर्ज बोल्ट ने अपनी पत्नी लुईस की याद में बनवाया था। जौर्ज बोल्ट अमेरिका का एक अरबपति था जो अपनी पत्नी से बहुत प्यार करता था और उनके लिए बोल्ट ने 1000 आईसलैंड पर इस महल का निर्माण करवाया। साल 1900 में इस महल का बनना शुरू हुआ और बोल्ट अपनी पत्नी को उसके जन्मदिन पर तोहफा देना चाहता था, लेकिन अपने जन्मदिन से 1 महीने पहले ही लुईस की मौत ही गई। आज इस महल को एक टूरिस्ट प्लेस के तौर पर जाना जाता है।

माउसोलस का मकबरा

टर्की देश के इस मकबरे का निर्माण 377 में हुआ और इसे किसी पति ने नहीं बल्कि एक महिला ने अपने पति की याद में बनवाया। यह उस समय का सबसे शानदान मकबरा माना जाता था। 125 फुट ऊंचा यह मकबरा तीन मंजिला है और इस पर शिल्पकाल की कृतियां बनी हुई हैं। राजा माउसोलस अपनी रानी अर्टमीसिया से बहुत प्यार करता था और उसके बिना जीने के बारे में सोच भी नहीं सकता था, लेकिन 352 में राजा माउसोलस की अचानक मौत हो गई और उसी की याद में रानी ने इस मकबरे का निर्माण करवाया।

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