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हिमाचल में हार से बीजेपी में बौखलाहट, बिना बजट के खोले थे सरकारी दफ्तर
नाहन। शिलाई विधानसभा क्षेत्र से कांग्रेसी विधायक हर्षवर्धन चौहान ने प्रदेश बीजेपी अध्यक्ष सुरेश कश्यप सहित भाजपा नेताओं पर पलटवार करते हुए तीखा प्रहार किया है। सरकारी कार्यालयों को डिनोटिफाई करने के प्रदेश बीजेपी अध्यक्ष सुरेश कश्यप के बयान पर हर्षवर्धन चौहान ने साफ किया कि प्रदेश को कैसे चलाना हैं, यह वर्तमान कांग्रेस सरकार का काम है, क्योंकि बीजेपी ने चुनाव में वोट ऐंठने के इरादे से बिना किसी योजना के करीब 900 सरकारी कार्यालय खोल दिए। हर्षवर्धन चौहान गुरुवार को जिला मुख्यालय नाहन में कार्यकर्ताओं से मुलाकात कर रहे थे। विधायक हर्षवर्धन ने कहा कि प्रदेश बीजेपी अध्यक्ष सुरेश कश्यप का बोलना स्वाभाविक है, क्योंकि उनके नेतृत्व में बीजेपी को विधानसभा चुनाव में करारी हार का सामना करना पड़ा है। लिहाजा उनकी बौखलाहट स्वाभाविक है। उन्होंने कहा कि बीजेपी ने चुनाव में वोट एंठने के मकसद से बिना किसी बजट व योजना के बहुत से सरकारी कार्यालय खोले थे। इन्हें खोलने के बावजूद बीजेपी को चुनाव में कोई विशेष लाभ नहीं हुआ है। लिहाजा उनके नेताओं को इन कार्यालयों को डिनोटिफाई करने पर तकलीफ भी हो रही है।
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हर्षवर्धन चौहान ने कहा कि प्रदेश को कैसे चलाना हैं, यह काम वर्तमान कांग्रेस सरकार का है। बीजेपी ने जाते समय रेवड़ियों के भाव सरकारी कार्यालय खोल गिए। इसमें डीएसपी, आईपीएच, पीडब्ल्यूडी, बिजली बोर्ड के आफिस आदि शामिल हैं। हर्षवर्धन चौहान ने कहा कि अकेले बिजली बोर्ड के लिए 32 कार्यालय पूर्व सरकार ने खोल दिए। जबकि हैरानी की बात यह है कि पिछले 40 साल में बिजली बोर्ड के 6 सरकारी कार्यालय ही खोले गए थे। इसके विपरीत पिछले 6 महीने में 32 बिजली बोर्ड के कार्यालय खोल दिए गए। वर्तमान में बिजली बोर्ड 1858 करोड़ के नुक्सान में है। आज सरकारी कर्मचारियों को देने के लिए वेतन नहीं है। सरकारी खजाने को पूर्व की सरकार खाली गई है। आज प्रदेश पर 75,000 करोड़ रुपये का कर्ज है।
हर्षवर्धन चौहान ने कहा कि पूर्व सरकार ने पिछले 6 महीनों में जो सरकारी कार्यालय खोले थे, उन्हें चलाने के लिए लगभग 5000 करोड़ रुपये सालाना पैसे की जरूरत है। हैरानी की बात यह है कि पूर्व सरकार ने इन कार्यालयों के लिए कोई नई नियुक्तियां नहीं की। पुराने सरकारी कार्यालयों से उठाकर यहां एक या दो कर्मचारी तैनात कर दिए गए। भाजपा की इस नीति से ना तो पुराने सरकारी कार्यालय ठीक से चल पा रहे हैं और ना ही नए कार्यालय। लिहाजा सीएम सुखविंदर सिंह सुक्खू ने नीतिगत फैसला लेते हुए पिछले 6 महीने में नियमों को दरकिनार कर खोले गए कार्यालयों को डिनोटिफाई करने का निर्णय लिया है। साथ ही जनहित में जो कार्यालय होंगे, उन्हें दोबारा से सरकार खोलेगी।
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