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हिमाचल पंचायत चुनाव: जानिए कब से शुरू होगा कार्यकाल और किसे मिलेगा कितना मानदेय
Himachal Elections: हिमाचल प्रदेश में त्रिस्तरीय पंचायतीराज चुनाव की प्रक्रिया 1 जून को सफलतापूर्वक संपन्न हो गई है। इसके साथ ही प्रदेश के गांवों में नई सरकार की तस्वीर साफ हो गई है। इस बार प्रदेशभर में रिकॉर्ड 31,182 जनप्रतिनिधि चुने गए हैं, जिनमें से 10,854 उम्मीदवारों ने निर्विरोध जीत दर्ज की है। चुनाव परिणाम आने के बाद अब नए जनप्रतिनिधियों और आम जनता के बीच सबसे बड़ी चर्चा कार्यकाल की शुरुआत और मिलने वाले मानदेय को लेकर है।
कब से शुरू होगा मानदेय और कार्यकाल?
हिमाचल प्रदेश पंचायतीराज अधिनियम, 1994 के सेक्शन-128 के अनुसार, नवनिर्वाचित प्रतिनिधियों को उनके मानदेय का भुगतान पहली आधिकारिक बैठक की तारीख से शुरू होता है।बैठक की यह तारीख राज्य सरकार द्वारा निर्धारित की जाती है। सूत्रों के मुताबिक, शपथ ग्रहण की औपचारिकताएं पूरी होने के बाद 15 जून के बाद नए प्रतिनिधियों का आधिकारिक कार्यकाल शुरू होने की संभावना है। पहली बैठक आयोजित होते ही सभी प्रतिनिधि मानदेय के हकदार हो जाएंगे।
7 जून से पहले होगा शपथ ग्रहण
पंचायती राज अधिनियम के तहत चुनाव परिणाम घोषित होने के एक सप्ताह के भीतर जिला परिषद और पंचायत समिति सदस्यों का शपथ ग्रहण अनिवार्य है। 31 मई को इनके नतीजे घोषित हुए थे, इसलिए 7 जून से पहले इन्हें शपथ दिलाई जाएगी।
जिला परिषद सदस्य: संबंधित जिले के DC शपथ दिलाएंगे।
पंचायत समिति सदस्य: DC द्वारा अधिकृत किए जाने पर संबंधित एसडीएम (SDM) शपथ दिलाएंगे।
प्रधान और उपप्रधान:सीएम एक विशेष कार्यक्रम आयोजित कर इन्हें शपथ दिलाएंगे (इसके लिए नियमों में कोई तय समय सीमा नहीं है)।
वार्ड सदस्य: पंचायत स्तर पर नवनिर्वाचित प्रधान द्वारा शपथ दिलाई जाएगी।
किसे मिलेगा कितना मानदेय? -पंचायतीराज संस्थाओं को आर्थिक रूप से मजबूत कर ग्रामीण विकास को गति देने के लिए सरकार द्वारा तय किया गया मानदेय इस प्रकार है:
जिला परिषद -अध्यक्ष₹25,000, जिला परिषद उपाध्यक्ष ₹19,000, जिला परिषद सदस्य₹8,300
पंचायत समिति– अध्यक्ष ₹12,000,पंचायत समिति उपाध्यक्ष₹9,000,पंचायत समिति सदस्य₹7,500
ग्राम पंचायत -प्रधान ₹7,500,उपप्रधान₹5,100
ग्राम पंचायत के वार्ड सदस्यों (मेंबर) को मासिक मानदेय के बजाय प्रति पंचायत बैठक ₹1050 दिए जाएंगे।
चुनाव के अहम आंकड़े: एक नजर मेंपंचायतों की संख्या बढ़ने के कारण इस बार 70,224 उम्मीदवारों के बीच कड़ा मुकाबला था, जिसमें से कुल 31,182 प्रतिनिधि चुने गए। ग्राम पंचायत प्रधान: 3,754ग्राम पंचायत उपप्रधान: 3,754ग्राम पंचायत वार्ड सदस्य: 21,654, पंचायत समिति सदस्य: 1,769, जिला परिषद सदस्य: 251
ग्रामीण क्षेत्रों में बढ़ती जिम्मेदारियों को देखते हुए सरकार को उम्मीद है कि इस नई व्यवस्था और आर्थिक सशक्तीकरण से ग्रामीण विकास की योजनाओं को धरातल पर अधिक प्रभावी ढंग से लागू किया जा सकेगा।
संजू चौधरी
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