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हिमाचल में बांस से रोग मुक्त होंगे लोग, कमाई का भी बनेगा जरिया, जाने कैसे
सोलन। हिमाचल में लोगों की सेहत का ख्याल रखने में अब बांस (बैंबू) भी महत्तवूर्ण भूमिका निभाएगा। इसके साथ ही यह लोगों की कमाई का भी जरिया बन सकता है। सोलन (Soaln) स्थित डॉ. वाइएस परमार औद्यानिकी एवं वानिकी विश्वविद्यालय नौणी (Dr. YS Parmar University) के वैज्ञानिकों ने बांस (Bamboo)से पाउडर तैयार किया है, जिसमें 70.25 फीसदी तक फाइबर है। इस बांस के पाउडर से केक या दूसरे बेकरी उत्पादों को स्वास्थ्यवर्धक बनाया जा सकता है। यही नहीं दूध या इससे बनने वाले उत्पादों में भी इसका इस्तेमाल किया जा सकता है। वहीं, जिन उत्पादों में फाइबर प्रचुर मात्रा में पाया जाता है, उनमें भी इस पाउडर का प्रयोग किया जा सकता है। खास बात यह है कि इस पाउडर को कई माह तक स्टोर करके रखा जा सकता।
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यह पाउडर पाचन क्षमता को बढ़ाता है और पेट के रोगों के लिए भी लाभदायक है। इसके अलावा यह शरीर में कोलेस्ट्राल की मात्रा को भी कम करता है। इसके नियमित सेवन से लोगों में हृदयघात का खतरा कम होता है। विश्वविद्यालय में असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. अंजू धीमान ने इस प्रोजेक्ट पर दो वर्ष तक शोध करने के बाद पाउडर बनाने की विधि तैयार की है। उन्होंने बैंबू डायट्री फाइबर पाउडर (Bamboo Dietary Fiber Powder) तैयार किया है। इसके इस्तेमाल से ऐसी तमाम खाद्य वस्तुओं को फाइबर युक्त बनाया जा सकता है, जिनमें फाइबर की मात्रा शून्य या फिर बहुत कम होती है।
कैसे मिली सफलता
शोध करने के लिए विज्ञानियों ने हमीरपुर व कांगड़ा जिला से बांस के कोमल हिस्से एकत्रित किए। डेंड्रोकलामस हैमिल्टन, फोईलोस्टैचिसए डेंड्रोकलामस स्ट्रिक्टस, बंबुसा नूतन बांस की किस्मों को शोध में शामिल किया। शोध के दौरान पाया कि डेंड्रोकलामस हैमिल्टन में सबसे अधिक फाइबर व अन्य पोषक तत्व हैं। इस बांस के अंदर के कोमल हिस्सों को काटकर 24 घंटे तक पानी में रखा। फिर उबालने के बाद सुखा दिया और पीसने के बाद लैब में फाइबर व अन्य पोषक तत्वों को अलग किया।
40 हजार में बिकेगी पाउडर बनाने की तकनीक
विश्वविद्यालय के कुलपति डा. परमिंदर कौशल ने बताया कि पाउडर बनाने की तकनीक को 40 हजार रुपये में बेचा जाएगा। यदि किसी व्यक्ति को इस प्रकार का उत्पाद तैयार करना है तो उसके लिए विश्वविद्यालय से समझौता ज्ञापन करना होगा। सभी प्रकार की तकनीकी सहायता विज्ञानी प्रदान करेंगे।
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