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शेर सिंह की शेर दिली: 80 बार रक्तदान, अपनी परवाह किए बिना जीवनदान
रविन्द्र चौधरी/कांगड़ा। ये हैं कांगड़ा में गग्गल के पास सोनारा चौक में रहने वाले शेर सिंह। नाम बेशक भारी-भरकम हो, लेकिन दिल के वे बेहद नर्म और संवेदनशील (Polite And Sensitive) हैं। उन्होंने जिंदगियां बचाने के लिए एक नहीं, 80 बार रक्तदान (Blood Donation) किया है। 2011 में पालमपुर में हुई बस दुर्घटना में खुद के घायल होने के बाद भी उन्होंने 25 जिंदगियों को बचाया (Saved 25 Lives) था। शेर दिल इंसान के शेर सिंह असल लाइफ में मुसीबतजदा लोगों के रियल हीरो हैं।
पशुपालन विभाग में डिप्टी डायरेक्टर के पद पर 38 साल तक नौकरी के बाद 2021 में रिटायर हुए शेर सिंह ने बताया कि वह 1986 से लगातार रक्तदान करते आ रहे हैं। यह सिलसिला अभी भी जारी है। इसके लिए उन्हें धर्मशाला और पालमपुर में सेना ने सम्मानित (Felicitated) किया था। इसके अलावा 2023 में मेडिकल कॉलेज टांडा ने भी सम्मानित किया था। 2022 में उन्हें अखिल भारत हिन्दू महासभा से भी सम्मान मिल चुका है। हालांकि, शेर सिंह को अफसोस है कि हिमाचल प्रदेश सरकार का उनके प्रति अभी तक का रवैया उदासीनता भरा रहा।

अपनी परवाह किए बिना लोगों की मदद की
उन्होंने बताया कि 2005 में धर्मशाला में एक टूरिस्ट बस दुर्घटनाग्रस्त (Tourist Bus Accident In Dharamshala) हुई थी। उसमें 19 यात्रियों की मौत हो गई थी तथा कई घायल हुए थे। 2006 में भी बस दुर्घटना में 21 यात्रियों की मौत हो गई थी। दोनों ही मौकों पर शेर सिंह ने मानवता की मिसाल देते हुए घायल यात्रियों को सिविल अस्पताल धर्मशाला में पहुंचाया। इसी तरह 2011 में पालमपुर में बारातियों से भरी हुई बस दुर्घटनाग्रस्त होकर पलट गई थी। इस में वह भी सवार थे। लेकिन घायल होने के बावजूद उन्होंने 25 घायल बारातियों को अस्पताल पहुंचाया।

