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मोहन भागवत ने ऐसा क्यों कहा  खुद के लिए जीना खुदगर्जी नहीं,  जानें यहां

धर्मशाला में पूर्व सैनिकों की संगोष्ठी में बोले सरसंघचालक, की यह अपील

मोहन भागवत ने ऐसा क्यों कहा  खुद के लिए जीना खुदगर्जी नहीं,  जानें यहां

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धर्मशाला। मेरा नाम मोहन (Mohan) है तो है, मैं हिंदू (Hindu) हूं तो हूं । धर्मशाला कालेज (Dharamshala College) के सभागार  में  पूर्व सैनिकों की संगोष्ठी में बोले सरसंघचालक मोहन भागवत (Mohan Bhagwat)। उन्होंने आगे कहा कि खुद के लिए जीना, खुदगर्जी नहीं। पूजा कोई किसी की करे। मनुष्य का मनुष्य के साथ मनुष्य जैसा व्यवहार ही हिंदुत्व है। गुरु नानक (Guru Nanak) सबसे पहले हिंदू शब्द लाए। किसी को जीतता नहीं। वसुधैव कटुंबकम मानते हैं हम। 33 करोड़ देवता हैं। फिर भाषाएं भी अलग हैं। भारत हमारी माता है। उसके प्रति भक्ति आवश्यक है। उन्होंने आगे कहा कि भारतीय सेना (Indian Army) किसी से कम नहीं है।

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दुनिया में हमारे सैनिक साहस और अनुशासन सबसे आगे हैं। परिस्थिति जैसी भी हो, भारतीय सैनिक वीरता के साथ लड़ता है। हम चीन (China) से पीछे हैं या आगे, यह बताया जा सकता है, किंतु  भारतीय सैनिक अपनी भारत माता की रक्षा के लिए सर्वोच्च बलिदान देने के लिए कभी पीछे नहीं हटते। इस दौरान सरसंघचालक मोहन भागवत ने सीडीएस बिपिन रावत और साथी सैनिकों की स्मृति में  एक मिनट का मौन रखा। उन्‍होंने आगे कहा  कि हम अपने आप में बंटे हैं, भाषा, प्रांत, खान-पान पर एक राष्ट्र के रूप में खड़े नहीं होते। अंबेडकर ने कहा था कि किसी के बल से नहीं हारे, अपनी कमजोरी से हारे। भाजपा सरसंघचालक ने कहा कि मैंने हवा में बात नहीं की थी।

यूनान, मिस्र, रोम (Rome) सब मिटे, हम नहीं। सबको जोड़ना होगा। हर रोज एक घंटे के लिए सिर्फ देश के बारे में सोचना होगा। हर रोज भारत के वीर पूर्वजों की गाथा सुने। किसी से भी किसी का नाम ना पूछें । बस उसे  अपना भाई  (Brother) समझें। ऐसा समाज बनाएं जो देशभक्त हो। सरसंघचालक ने कहा कि  मीडिया हमें रिमोट कंट्रोल (Remote Controlled) चलाने वाला बताती है, ऐसा नहीं है। हमारे कुछ कार्यकर्ता वहां अवश्य हैं। है। देश का भाग्य बनेगा तो व्यक्ति का भी बनेगा। उन्होंने कहा कि अब दुनिया (World) भारत से माडल चाहती हैए हम विश्व शक्ति बनें न बनें, पर विश्व गुरु तो बन ही सकता है। उन्होंने पूर्व सैनिकों का आभार जताते हुए कहा है कि आप सीमा पर खड़े रह कर सब कुछ कर चुके हैं। आप संघ का परिचय अंदर से पाइए,  बाहर से पता नहीं चलता।

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