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ऊना में लंपी स्किन डिजीज का कहर, सात दिन में सामने आए 2500 मामले; 130 की मौत

जिला में इस बीमारी के 6 हजार पहुंचे मामले, 218 मवेशियों की हो चुकी है मौत

ऊना में लंपी स्किन डिजीज का कहर, सात दिन में सामने आए 2500 मामले; 130 की मौत

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ऊना। लंपी स्किन डिजीज (Lumpy Skin Disease) के मामलों में लगातार बढ़ोतरी हो रही है। पिछले रविवार तक जिला में यह आंकड़ा 35 सौ के करीब था, वहीं अब महज एक सप्ताह में यह आंकड़ा बढ़ कर 6000 को पार कर चुका है। यानी की मात्र एक सप्ताह के भीतर 2500 के करीब मवेशी इस रोग की चपेट में आ चुके हैं, वहीं दूसरी तरफ एक सप्ताह के भीतर ही करीब 130 पशुओं (Animals) की मौतें भी दर्ज की जा चुकी है। जिला में अब तक मौतों का आंकड़ा 218 को पार कर चुका है। जिला में इस बीमारी से प्रभावित पशुओं का रिकवरी रेट करीब 25 फ़ीसदी तक आ पहुंचा है। गौरतलब है कि हिमाचल प्रदेश में इस बीमारी के चलते सबसे ज्यादा पशु ऊना जिला में ही प्रभावित हुए हैं।

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पशुपालन विभाग (Animal Husbandry Department) की रैपिड रिस्पांस टीम के प्रभारी डॉक्टर आरके भट्टी की अगुवाई में पशुशालाओं और गौशालाओं में पहुंचकर मवेशियों के उपचार में जुटी है। प्रदेश भर में सबसे ज्यादा मामले ऊना (Una) जिला में आने का सबसे बड़ा कारण दूसरे राज्यों से इस जिला में पशुओं की खरीद-फरोख्त आसानी से होना भी माना जा रहा है। इस बीमारी के चलते पशुपालन व्यवसाय को भी तगड़ा झटका लगा है।

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15 दिन रहता है बीमारी का असर

करीब 15 दिन तक यह बीमारी पशु को अपनी चपेट में जकड़ कर रखती है जिसमें सही उपचार (Treatment) नहीं मिलने के चलते पशु की जान भी जा सकती है। इस बीमारी का सबसे ज्यादा प्रभाव गाय पर देखा गया है। पशुपालन विभाग की रैपिड रिस्पांस टीम (Rapid Response Team) के प्रभारी डॉ आरके भट्टी की अगुवाई में विभागीय अधिकारी और कर्मचारी गौशालाओं और लोगों की निजी पशुशालाओं में पहुंचकर मवेशियों का उपचार करने में जुटी हैं।

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लंपी स्किन डिजीज से पीड़ित मवेशी का कच्चा दूध हानिकारक

डॉ. आरके भट्टी ने कहा कि कुछ लोगों में इस बीमारी से पीड़ित मवेशियों का दूध (Milk) इस्तेमाल नहीं करने को लेकर भी भ्रांतियां हैं, लेकिन स्किन डिजीज से जूझ रहे मवेशियों के दूध को उबालकर इस्तेमाल किया जा सकता है जबकि कच्चा दूध इस्तेमाल करने पर यह हानिकारक साबित हो सकता है। उन्होंने बताया कि जिला भर में अभी तक 6084 मवेशी इस बीमारी की चपेट में आए हैं, जिनमें से 1564 पशु रिकवर कर चुके हैं। वहीं 218 पशुओं की मौत हो चुकी। डॉ. आरके भट्टी ने बताया कि पशुपालक इस बीमारी को लेकर सजग रहें और किसी भी प्रकार के लक्षण नजर आने पर तुरंत पशुपालन विभाग के चिकित्सकों व कर्मचारियों से संपर्क करेंए ताकि मवेशियों को सही उपचार देकर जल्द रिकवर किया जा सके।

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