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हिमाचल हाईकोर्ट में हुई महिलाओं को बस किराए में छूट मामले की सुनवाई, यहां जाने डिटेल

हिमाचल हाईकोर्ट में इस मामले पर सरकार की ओर से की जाएगी बहस

हिमाचल हाईकोर्ट में हुई महिलाओं को बस किराए में छूट मामले की सुनवाई, यहां जाने डिटेल

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शिमला। हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ( himachal High Court) में सरकार द्वारा महिलाओं को 50 फ़ीसदी बस किराए में छूट (50% discount on bus fare) देने को चुनौती देने वाली याचिका पर फिर से सुनवाई हुई। कोर्ट ने मामले पर फिर से सुनवाई का कारण स्पष्ट करते हुए कहा था कि इस मामले में फैसला लिखाते समय यह लगा कि याचिकाकर्ता निजी बस ऑपरेटर संघ का विवरण और उसका अधिकार क्षेत्र जानना बहुत जरूरी है। इसलिए याचिका में उत्पन्न इस समस्या को ठीक करने के लिए याचिका कर्ता की ओर से समय मांगा गया था। याचिकाकर्ता की ओर से अब कोर्ट को बताया गया कि यह याचिका निजी बस ऑपरेटर यूनियन द्वारा नहीं बल्कि ट्रांसपोर्टर रमेश कमल की ओर से दायर की गई है। इस वक्तव्य के पश्चात न्यायाधीश तरलोक सिंह चौहान व न्यायाधीश विरेंदर सिंह की खंडपीठ ने इस याचिका को निजी तौर पर दायर याचिका (Petition) मान लिया। अब मामले पर सुनवाई 16 नवम्बर को सरकार की ओर से बहस की जायेगी।

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उल्लेखनीय है कि इस मामले में प्रधान सचिव व निदेशक परिवहन ने कोर्ट को शपथ पत्र के माध्यम से बताया था कि सरकार से इस फैसले से परिवहन निगम को लगभग 60 करोड़ रुपए का घाटा उठाना पड़ेगा। कोर्ट को यह भी जानकारी दी गई थी कि परिवहन निगम ने 31 मार्च 2022 तक 221 करोड रुपए का रोड टैक्स अदा नहीं किया है। न्यायालय को बताया गया था कि महिलाओं को किराए में छूट देने का निर्णय कैबिनेट का है जिसे 25 फ़ीसदी से बढ़ाकर 50 फ़ीसदी किया गया है। महिलाओं को बस किराए में छूट (Bus fare discount for women) देने बारे प्रस्ताव राज्य सरकार को भेजा गया था जिसे राज्य सरकार ने कैबिनेट के समक्ष रखा और उसे कैबिनेट ने मंजूरी दे दी। आरोप है कि राज्य सरकार द्वारा 7 जून 2022 को जारी की गई यह अधिसूचना कानून के सिद्धांतों के विपरीत है। जबकि महिलाओं व पुरुषों के लिए बराबर किराया होना चाहिए। पथ परिवहन निगम द्वारा ग्रीन कार्ड जारी करने को भी प्रदेश उच्च न्यायालय के समक्ष चुनौती दी गई है। इस विषय में यह दलील दी गई है कि पथ परिवहन निगम द्वारा ग्रीन कार्ड जैसी सुविधाएं देने की वजह से उन्हें नुकसान उठाना पड़ता है।

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