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Dwarkadhish Temple: द्वारकाधीश मंदिर से जुड़े रहस्य जानकर हैरान हो जाएंगे आप
Dwarkadhish Temple: गुजरात में स्थित द्वारकाधीश मंदिर (Dwarkadhish Temple) को भगवान श्री कृष्ण की राजधानी माना जाता है। ये मंदिर हिंदू धर्म में बेहद महत्वपूर्ण स्थान रखता है। सभी पवित्र स्थानों में से एक द्वारकाधीश मंदिर भगवान श्रीकृष्ण (Shri Krishna) जी को समर्पित है। रविवार को पीएम नरेंद्र मोदी (PM Narendra Modi) द्वारका पहुंचे थे और उन्होंने यहां आस्था की डुबकी भी लगाई। द्वारका में देश के सबसे लंबे केबल ब्रिज ‘सुदर्शन सेतु’ का उद्घाटन करने के बाद पीएम मोदी ने मंदिर में पूजा की।
2500 साल पुराना मंदिर
इतिहासकारों का मानना है कि द्वारकाधीश मंदिर को श्रीकृष्ण के पोते ने बनवाया था। अनुमान लगाया जाता है कि ये मंदिर करीब 2500 साल पुराना है। शायद ही कोई जानता होगा कि यहां मंदिर का ध्वज (Flag) दिन में 5 बार बदला जाता है। जिसके बदलने का एक निश्चित समय है। इतना ही नहीं इस ध्वज को भक्तों द्वारा ही स्पॉन्सर किया जाता है यानी भक्तों को पहले बुकिंग करनी पड़ती है। ये मंदिर 5 मंजिला है और इसके दो मुख्य प्रवेश द्वार हैं। मुख्य द्वार को मोक्ष द्वार और दूसरे को स्वर्ग द्वार माना जाता है।
52 गज का ध्वज
वहीं, मंदिर पर चढ़ने वाला ध्वज 52 गज का होता है। इसके पीछे भी कई मान्यताएं हैं। माना जाता है कि 12 राशि, 27 नक्षत्र, सूर्य, चंद्र, 10 दिशाएं, और श्री द्वारकाधीश मिलकर 52 हो जाते हैं। इसलिए ध्वज को 52 गज का रखा जाता है। वहीं, एक अन्य मान्यता के मुताबिक, एक समय था जब द्वारका में 52 द्वार थे और ये ध्वज इसी का प्रतीक है। बताया जाता है कि जब ध्वज को बदला जाता है तो उसे देखने की मनाही होती है।
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कैसे बदलते हैं ध्वज
ध्वज बदलने के लिए श्रद्धालु पहले एडवांस बुकिंग करवाते हैं। जिसे भी ये मौका प्राप्त होता है वह बड़ी श्रद्धा भाव के साथ नाचते गाते हाथ में ध्वज लेकर आते हैं और भगवान को समर्पित कर देते हैं। यहां पर फिर अबोटी ब्राह्मण द्वारा ध्वज को ऊपर ले जाया जाता है और फिर बदला जाता है। मंदिर में ध्वज आरती के दौरान चढ़ाया जाता है।
-नेशनल डेस्क
