-
Advertisement
HPBOSE की नई पहल: 9वीं से 12वीं तक के छात्रों के लिए डिजिटल होलिस्टिक प्रोग्रेस कार्ड शुरू
HPBOSE: हिमाचल प्रदेश स्कूल शिक्षा बोर्ड (HPBOSE) ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP-2020) के अनुरूप प्रदेश की शिक्षा प्रणाली में एक क्रांतिकारी बदलाव की नींव रखी है। विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास को मापने के लिए अब केवल अंकों पर निर्भर रहने के बजाय उनके कौशल, व्यवहार और मानसिक विकास का आंकलन होलिस्टिक प्रोग्रेस कार्ड (HPC) के जरिए किया जाएगा। सोमवार, 20 अप्रैल 2026 से प्रदेश के दो प्रमुख जिलों—शिमला और कांगड़ा—में इसका पायलट प्रोजेक्ट विधिवत रूप से आरंभ कर दिया गया है।
PARAKH और NCERT के सहयोग से तैयार हुआ डिजिटल ढांचा
स्कूल शिक्षा बोर्ड के अध्यक्ष डॉ. राजेश शर्मा ने बताया कि यह प्रगति पत्रक केंद्र सरकार की संस्था PARAKH और NCERT, नई दिल्ली के विशेष सहयोग से तैयार किया गया है। वर्तमान में इसे सेकेंडरी स्टेज यानी कक्षा नौवीं से बारहवीं तक के छात्रों के लिए विकसित किया गया है। यह कार्ड पूरी तरह से डिजिटल प्रारूप में होगा, जिससे न केवल डेटा प्रबंधन आसान होगा, बल्कि यह अधिक पारदर्शी और विद्यार्थी-केंद्रित भी बनेगा।
पहले चरण में शिमला और कांगड़ा के 10 स्कूल चयनित
पायलट प्रोजेक्ट के तहत बोर्ड ने रणनीतिक रूप से शिमला और कांगड़ा जिलों का चयन किया है। इन जिलों के कुल 10 विद्यालयों में इसे लागू किया गया है, जिनमें निम्नलिखित का समावेश है:
राजकीय एवं निजी विद्यालय: सरकारी और प्राइवेट दोनों क्षेत्रों में इसकी उपयोगिता जांची जाएगी।
ग्रामीण एवं शहरी क्षेत्र: भौगोलिक परिस्थितियों के आधार पर फीडबैक लिया जाएगा।
क्या है HPC और कैसे बदलेगी पढ़ाई की तस्वीर?
पारंपरिक रिपोर्ट कार्ड में जहां केवल विषयों के अंक दर्ज होते थे, वहीं HPC विद्यार्थियों के समग्र व्यक्तित्व का दर्पण होगा। डॉ. राजेश शर्मा के अनुसार, इसके मुख्य लाभ इस प्रकार होंगे:
समग्र विकास: शैक्षणिक अंकों के साथ-साथ छात्र की रचनात्मकता, आलोचनात्मक सोच (Critical Thinking) और सामाजिक-भावनात्मक कौशल को ट्रैक किया जाएगा।
कक्षावार मूल्यांकन: प्रत्येक कक्षा की आवश्यकताओं के अनुसार अलग-अलग कार्ड तैयार किए गए हैं।
पारदर्शिता: डिजिटल होने के कारण शिक्षक, विद्यार्थी और अभिभावक बच्चे की प्रगति को वास्तविक समय (Real-time) में देख सकेंगे।
HPBOSE के अध्यक्षडॉ. राजेश शर्मा ने कहा इस परियोजना के माध्यम से हमारा उद्देश्य हिमाचल की शिक्षा प्रणाली को आधुनिक और अधिक प्रभावी बनाना है। पायलट प्रोजेक्ट की सफलता के बाद इसे चरणबद्ध तरीके से पूरे प्रदेश के सभी स्कूलों में लागू करने की योजना है।”
हिमाचल अभी अभी की सभी खबरों के पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें

