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किन्नौर के रिब्बा में फ्लैश फ्लड -चोलिंग में लैंडस्लाइड, मलबे में दबी गाड़ियां, NH ब्लॉक
Himachal Weather: हिमाचल प्रदेश में मॉनसून की बारिश आफत बनकर बरस रही है। बीते दो दिनों के भीतर राज्य में सामान्य से 211 फीसदी ज्यादा बारिश दर्ज की जा चुकी है, जिससे नदी-नाले उफान पर हैं और जनजीवन पूरी तरह अस्त-व्यस्त हो गया है। सबसे ज्यादा तबाही किन्नौर जिले में देखने को मिली है, जहां भारी बारिश के बाद फ्लैश फ्लड और भूस्खलन (लैंडस्लाइड) ने भारी नुकसान पहुंचाया है।
किन्नौर में आधी रात को मची चीख-पुकार, NH ब्लॉक
किन्नौर के चोलिंग में बीती रात तेज बारिश के बाद पहाड़ों से भारी मात्रा में मलबा और चट्टानें नेशनल हाईवे पर आ गिरीं। इस मलबे की चपेट में आने से दो गाड़ियां मलबे में दब गईं। गनीमत रही कि कोई जानी नुकसान नहीं हुआ, लेकिन इसके बाद से नेशनल हाईवे पर वाहनों की आवाजाही पूरी तरह ठप हो गई है।वहीं, किन्नौर के ही रिब्बा गांव में सुबह करीब 3 बजे अचानक आए फ्लैश फ्लड (अचानक आई बाढ़) से ग्रामीणों में हड़कंप मच गया। डर के मारे लोग तड़के ही अपने घरों से बाहर निकल आए और अपनी गाड़ियों को सुरक्षित स्थानों पर हटाने की जद्दोजहद में जुट गए।
49 सड़कें और 127 ट्रांसफॉर्मर ठप
राज्य में पिछले तीन दिनों से जारी मूसलाधार बारिश के कारण बुनियादी सुविधाएं चरमरा गई हैं। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, प्रदेश में 49 सड़कें यातायात के लिए बंद हो चुकी हैं। इसके अलावा 42 बिजली ट्रांसफॉर्मर फुंकने से कई इलाके अंधेरे में डूब गए हैं, जबकि 27 पेयजल योजनाएं ठप होने से पानी का संकट खड़ा हो गया है।
मौसम विभाग का अलर्ट: 5 जुलाई से फिर मचेगा हाहाकार
मौसम विभाग (IMD) के अनुसार, अगले छह दिनों तक प्रदेशवासियों को बारिश से कोई राहत मिलने के आसार नहीं हैं। कुछ स्थानों पर भारी बारिश की आशंका के चलते ऑरेंज अलर्ट जारी किया गया है। वहीं कुल्लू, शिमला, सिरमौर और ऊना जिलों के लिए यलो अलर्ट दिया गया है। मौसम विज्ञान केंद्र के मुताबिक, 5 जुलाई को वेस्टर्न डिस्टरबेंस (पश्चिमी विक्षोभ) एक बार फिर सक्रिय और मजबूत हो रहा है। इसके असर से अगले 48 घंटों यानी 5 और 6 जुलाई को राज्य के मध्यम, ऊंचे व निचले इलाकों में भारी से बहुत भारी बारिश का पूर्वानुमान है।
मौसम विभाग ने स्थानीय लोगों और पर्यटकों से अपील की है कि वे भारी बारिश के दौरान नदी-नालों के पास बिल्कुल न जाएं। लैंडस्लाइड (भूस्खलन) संभावित क्षेत्रों और संवेदनशील रास्तों पर यात्रा करने से बचें और मौसम की ताजा चेतावनियों को देखकर ही घरों से बाहर निकलें।
अमित नेगी

